गुरुवार, 14 दिसंबर 2017

कैंची धाम, उत्तराखंड

चारों ओर से ऊँचे-ऊँचे पहाड़ों से घिरे परिसर में हनुमान जी के अलावा भगवान राम एवं सीता माता तथा देवी दुर्गा जी के साथ-साथ करोली बाबा का भी मंदिर है जिसमें उनकी बिलकुल सजीव सी प्रतिमा स्थापित है, जिसे देख एक क्षण के लिए तो दर्शनार्थी चकमा ही खा जाता है। कैंची धाम मुख्य रूप से बाबा नीम करौली और हनुमान जी की महिमा के लिए प्रसिद्ध है


हमारे देश में सैकड़ों ऐसी जगहें मौजूद हैं, जिनके विख्यात होने के बावजूद बहुत ही कम लोगों को उनके बारे में जानकारी होती है। ऐसा ही एक स्थान है देव्-भूमि उत्तराखंड के नैनीताल जिले में अल्मोड़ा-रानीखेत राष्ट्रीय राजमार्ग पर नैनीताल से करीब 38 की.मी. की दूरी पर  स्थित एक दिव्य, रमणीक, लुभावना स्थल कैंची धाम। यहां सड़क कैंची की तरह दो मोड़ों से होकर आगे बढ़ती है इसीलिए इस जगह का नाम कैंची मोड़ और मंदिर का नाम कैंची धाम पड़ गया। जिसे नीम करोली बाबा का कैंची धाम नाम से भी जाना जाता है। कहते हैं कि1964  में उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के एक गांव अकबरपुर से लक्ष्मी नारायण शर्मा नामक एक युवक ने यहां आ कर रहना शुरू किया था। चूँकि यहां आने से पहले उस युवक ने फर्रूखाबाद के गांव नीब करौरी में कठिन तपस्य़ा की थी, इसी कारण वे बाबा नीम करौली कहलाने लगे। महाराजजी की गणना बीसवीं शताब्दी के सबसे महान संतों में होती है। 


उन्होंने 15 जून,1964  को कैंची धाम में हनुमान जी की मूर्ति की प्रतिष्ठा की, तभी से 15 जून प्रतिष्ठा दिवस के रूप मे मनाया जाता है। चारों ओर से ऊँचे-ऊँचे पहाड़ों से घिरे परिसर में हनुमान जी के अलावा भगवान राम एवं सीता माता तथा देवी दुर्गा जी के साथ-साथ करोली बाबा का भी मंदिर है जिसमें उनकी बिलकुल सजीव सी प्रतिमा स्थापित है, जिसे देख एक क्षण के लिए तो दर्शनार्थी भी चकमा खा जाता है !

कैंची धाम मुख्य रूप से बाबा नीम करौली और हनुमान जी की महिमा के लिए प्रसिद्ध है। ऐसी मान्यता है कि यहाँ आने पर व्यक्ति अपनी सभी समस्याओं के हल प्राप्त कर सकता है।


हर साल यहां 15 जून को विशाल मेला लगता है जिसमें देश-विदेश से  भक्तजन यहां पधारकर अपनी श्रद्धा व आस्था को व्यक्त करते हैं। मान्यता है कि यहां पर श्रद्धा एवं विनयपूर्वक की गयी पूजा कभी भी व्यर्थ नहीं जाती है तथा मांगी गयी हर मनौती पूर्णतया फलीभूत होती है।

बाबा को यह जगह बहुत पसंद थी, वे यहां अपने निर्वाण दिवस 11 सितम्बर, 1973 तक अक्सर आते रहे थे। उनके साथ अनेक अलौकिक कथाएं जुडी हुई हैं। उन्होंने अपने तपो-बल से लोगों का सदा उपकार कर उन्हें कष्टों, मुसीबतों से निजात दिलवाई। उनके भक्त तो उन्हें हनुमान जी का ही रूप मानते हैं।  कैंची धाम और खासकर स्वर्गीय नीम करौली बाबा के भक्तों की यहां खूब आस्था है। Apple के संस्थापक स्टीव जॉब्स और Facebook के संस्थापक व मौजूदा सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने भी कैची मंदिर आकर अपने जीवन को एक नई राह दी और अपार सफलता हासिल की। इसके अलावा जूलिया रॉबर्ट्स, डॉक्टर रिचर्ड एल्पेर्ट और मशहूर लेखक डेनियल भी यहां आ चुके हैं। 

6 टिप्‍पणियां:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (15-12-2017) को
"रंग जिंदगी के" (चर्चा अंक-2818)

पर भी होगी।
--
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
--
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (15-12-2017) को
"रंग जिंदगी के" (चर्चा अंक-2818)

पर भी होगी।
--
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
--
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

sweta sinha ने कहा…

जी नमस्ते,
आप की रचना को शुक्रवार 15 दिसम्बर 2017 को लिंक की गयी है
पांच लिंकों का आनंद पर...
आप भी सादर आमंत्रित हैं...धन्यवाद।

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

शास्त्री जी, स्नेह बना रहे

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

श्वेता जी,
आभार

Team Book Bazooka ने कहा…

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