रविवार, 13 सितंबर 2015

निर्मला, जिसका कहा बिगड़ैल हाथी भी मानते हैं

निर्मला जानवरों से नफ़रत नहीं करती बल्कि इंसान और जानवर दोनों को बचाने में उसने अपना जीवन समर्पित कर दिया है। स्थानीय तथा उसे जानने वाले लोग उसे "एलिफेंट व्हिस्परर" कहने लगे हैं।       

बचपन में पढ़ी-सुनी कहानियों में अक्सर ऐसे लोगों का जिक्र आता था जो पशु-पक्षियों की आवाज समझ बोल लेते थे। ऎसी बातें सुन आनंद भी आता था और संभव न होते हुए भी वैसा कर पाने या ऐसे लोगों से मिलने की इच्छा भी होती थी। वर्षों बाद आज जाने-माने वरिष्ठ पत्रकार एन. रघुरामन जी के सौजन्य से एक अद्भुत जानकारी प्राप्त हुई।    

निर्मला 
झारखंड के सिमडेगा जिले के सिहारजोर गांव में उड़िया भाषी निर्मला नाम की एक युवती रहती है जिसमें हाथियों से संवाद स्थापित करने की अद्भुत ईश्वर प्रदत्त क्षमता है। मात्र 16-17 साल की यह कन्या अपनी  इस नेमत का उपयोग कर वह वर्षों से इंसान और उनकी संपत्ति को जंगल से भटक कर गांवों में चले आए हाथियों से बचाती चली आ रही है। हाथी चाहे कितने भी आक्रोश में हों वे निर्मला के मधुर संगीत और इशारों से शांत हो वापस जंगल की ओर लौट जाते हैं। ठीक उनके सामने खड़े हो, उनकी आँखों में आँखें डाल निर्मला अपने गाने द्वारा उनसे प्रार्थना तो करती ही है पर डांटने से भी नहीं चूकती। उसके संगीत का अर्थ होता है कि, "हमें आप से प्रेम है, आपकी परवाह है, हम किसी को नुक्सान या दुःख देना नहीं चाहते। पर आप हमारी शांति भंग कर रहे हैं।  कृपया यहां से चले जाएं।" आश्चर्य है कि हर बार हाथी उसकी बात मान वापस चल देते हैं। अब यह पता नहीं है कि वे निर्मला के शब्द समझते हैं या यह संगीत का जादू है। यह कला निर्मला को अपने पिता से विरासत में मिली है, जिनकी मौत गांव को हाथियों से बचाते-बचाते ही हुई थी। फिर भी निर्मला जानवरों से नफ़रत नहीं करती बल्कि इंसान और जानवर दोनों को बचाने में उसने अपना जीवन समर्पित कर दिया है। स्थानीय तथा उसे जानने वाले लोग उसे "एलिफेंट व्हिस्परर" कहने लगे हैं। इस सब के बावजूद गांव वाले हाथियों को हटाने के लिए अपने पुराने तौर-तरीके जैसे ढोल बजाना या पटाके फोड़ने के साथ-साथ मशाल वगैरह का उपयोग भी करते हैं। वैसे भी स्कूल की छात्रा निर्मला खुद को स्नातक करना चाहती है जिससे उसका परिवार आज की गरीबी से
पार्वती 
कुछ हद तक निजात पा सके।

  

इसके पहले आसाम की पार्वती बरुआ का नाम जरूर सुना था, जो शायद देश ही नहीं संसार की पहली और अकेली महिला महावत हैं। उन्हें भी हाथियों को काबू करने और सिखाने की महारत हासिल है, उनके इस काम में उनके प्रशिक्षित हाथी भी सहायता करते हैं, पर निर्मला तो अपनी इस दैवीय शक्ति के कारण जीते-जी किवदंती बन चुकी है।  चुपचाप अपने काम से मतलब रखने वाली इन महिलाओं को कितने लोग जानते है ?                

1 टिप्पणी:

मन के - मनके ने कहा…

इस सुम्दर व अद्दभुत जानकारी के धन्यवाद.
साथ ही आपकी इस रुचि के लिये भी आभार कि,
आपने इन रोचक व्यक्तियों को हम तक पहुंचाया.