शनिवार, 5 नवंबर 2011

पांच करोड़ जीतने के साथ मुसीबतें मुफ्त

अभी-अभी संपन्न हुए 'पंचकोटी महा-मनी' के विजेता बने सुशील कुमार की समस्याएँ शुरू होती हैं ........अब

अभी ज्यादा दिन नहीं हुए। पिछले हफ्ते की ही बात है, बिहार के मोतीहारी जिले के सुशील कुमार ने टी.वी. के 'कौन बनेगा करोड़पति' के माध्यम से शायद देश की सबसे बडी इनामी राशि जीतने का गौरव लाखों लोगों के सामने हासिल किया।दुनिया के सामने रातों-रात मिले धन और प्रसिद्धि ने जहां ढेरों खुशियां झोली में डाल दीं वहीं कुछ अनपेक्षित समस्याएं भी बिन बुलाए आ खड़ी हुईं हैं।


उस समय उनकी माली हालत को देखते हुए बहुत से लोगों की सहानुभूति उनके साथ रही होगी, बहुतों को अच्छा लगा होगा, बहुतेरे मन मसोस कर रह गये होंगे, कुछ निरपेक्ष रहे होंगें और कुछ समय के बाद ऐसे सभी लोग अपने-अपने काम में मशगूल हो गये होंगें। पर असली खेल या कहिए सुशील की मुश्किलात का समय शुरु होता है अब;


सुनने में आ रहा है कि जीतने के बाद खेल में भाग लेने गये लोग वापस अपने घर जाने में हिचकिचा रहे हैं। वे ही नहीं उधर मोतीहारी में बैठे घर के सदस्य भी अपनी और सुशील की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। जिसकी वजह है बिहार के पुराने हालात, जहां छोटी-छोटी रकमों के लिए ही लोगों का अपहरण कर लिया जाता था और यह तो बहुत बड़ी धन-राशि है। हालात पहले से बहुत सुधरे हैं पर फिर भी ड़र बना हुआ है।


यह सारा कुछ उस कहावत की याद दिलाता है कि पैसा ना हो तो मुश्किल और हो तो भी मुश्किल। इतना ही नहीं सुशील कुमार के इतनी बड़ी रकम जितने के बाद उनके नजदीकी भाई-बंधुओं, दोस्त-मित्रों, सगे-सम्बंधियों ने अपने-अपने स्तर पर बहुतेरी आशाएं संजो ली होंगी और यदि किसी कारणवश वे पूरी नहीं हो पातीं तो रिश्तों में भी खटास आने की संभावना बढ जाएगी।


इन सबके अलावा बहुत सारे बीमा एजेंट, बैंकों के प्रतिनिधी, रियल एस्टेट वाले और भी ना जाने कितने ढेरों लोग अपने-अपने धंधों की स्कीमों को लेकर सुशील की राह में पलक-पांवड़े बिछाए इस मोतीहारी के नायक का बेसब्री से इंतजार कर रहे होंगें। भले ही इन सारे लोगों की नियत में खोट ना भी हो तो भी रोज-रोज उनकी जिंदगी में दखलंदाजी कर और कुछ नहीं तो तनाव का तोहफा तो जरूर पूरे परिवार को देंगें ही। खैर जब लक्ष्मीजी आईं हैं तो इतना सब तो सहना ही पड़ेगा।


अब तो यही है कि यदि भगवान ने जिंदगी में सुखद समय लाने का प्रबंध किया है तो वह सही मायनों में सुखद हो।



































9 टिप्‍पणियां:

jr... ने कहा…

Haan ye bat to hai..magar thodi samajhdaari se kaam bigad ne se ban sakta hai....Baki bhagwan he maalik.

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

बहुत संभव है कि यही कारण हो, घर न जाने का।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा आज के चर्चा मंच पर भी की गई है!
यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।">चर्चा

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) ने कहा…

सही बात कही है सर!

सादर

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') ने कहा…

संभव है...
सार्थक चिंतन...
सादर....

सुशील बाकलीवाल ने कहा…

इस विपुल धनराशि क साथ सुशील कुमारजी अपनी मनपसंद जगह पर आराम से रह सकते हैं जहाँ इनमें से कोई भी मुसीबत उनके चाहे बगैर न आ सके.

रचना दीक्षित ने कहा…

शुभकामनयें सुशील कुमार जी के साथ. जीतने के बाद भी वोह सही निर्णय ले सकेंगे.

Ratan Singh Shekhawat ने कहा…

हम तो सुशील को सिर्फ शुभकामनाएँ ही दे सकते है

मन के - मनके ने कहा…

हो तो मुसीबत,ना हो तो मुसीबत.