गुरुवार, 26 अक्तूबर 2017

एक खूबसूरत रेलवे स्टेशन, काठगोदाम

#चौहान_पट्टा, अंग्रजों के समय में यह एक छोटा सा गांव हुआ करता था। पहाड़ों से पेड़ काट कर यहां ला कर इकट्ठे किए जाते थे, फिर यहां से सुविधानुसार उन्हें अलग-अलग जगहों पर भेजा जाता था। लकड़ियों का डिपो होने के कारण इस जगह का नाम काठगोदाम पड़  गया था........
#हिन्दी_ब्लागिंग  
#काठगोदाम, देश के सबसे सुंदर, साफ़-सुथरे, शांत, व्यवस्थित, खूबसूरत रेलवे स्टेशनों में से एक। नाम तो वर्षों से सुना, जाना-पहचाना हुआ था पर कभी वहाँ रुकना नहीं हो पाया था क्योंकि उधर जाने के लिए सदा बसों का ही सहारा लिया गया था। इस बार जब अल्मोड़ा का कार्यक्रम बना तो ट्रेन को प्राथमिकता दी गयी। जाने के लिए दिल्ली-काठगोदाम सम्पर्क क्रान्ति और लौटने के लिए काठगोदाम-नई दिल्ली शताब्दी में आरक्षण करवाया गया। जाने पर पाया कि उसके बारे में जितना सुना था वह उससे कुछ ज्यादा ही अनुरूप था। 
काठगोदाम रेलवे स्टेशन 

    
   
साफ़-सुथरा प्लेटफार्म 
  
प्रकृति की गोद में 

सीढ़ियों पर संदेश 

शहीदों की यादगार
चौहान पट्टा इसका असली नाम है, जो आज भी जमीन के कागजों-दस्तावेजों में दर्ज है।  अंग्रजों के समय में यह एक   छोटा  सा गांव हुआ करता था।   पहाड़ों से   पेड़ काट कर यहां ला कर इकट्ठे किए जाते थे, फिर यहां से सुविधानुसार उन्हें अलग-अलग जगहों पर भेजा जाता था।  लकड़ियों का डिपो  होने के कारण  इस जगह का नाम काठगोदाम  पड़  गया था।  फिर 1884 में जब रेल हल्द्वानी से बढ़ कर यहाँ तक पहुंच गयी तो इस जगह कीअहमियत भी  बढ़ गयी । यह  उत्तराखंड में शिवालिक की  पहाड़ियों की तलहटी में,  गौला  नदी के किनारे, मैदान में बसा कस्बानुमा शहर है जो कुमाऊं अंचल का प्रवेश द्वार है। पूर्वोत्तर रेलवे का यह अंतिम स्टेशन है। पंतनगर नजदीक का हवाई-अड्डा है। पर यहाँ से चहुँ ओर के लिए सड़क मार्ग उपलब्ध है। जिनसे नैनीताल, रानीखेत, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ आदि कहीं भी जाया जा सकता है।  
शताब्दी एक्सप्रेस 





प्रतीक्षा
19वीं सदी में ब्रिटिश हुकूमत ने अपनी सुविधा के लिए  एक 66 मील लम्बी रेलवे लाइन  बिछाई थी. जो रोहिलकुण्ड-कुमाऊं रेलवे के नाम से जानी जाती थी और काठगोदाम को बरेली से जोड़ती थी। बाद में इसे 1943 में इसे भारत सरकार की अवध-तिरहुत रेलवे में मिला दिया गया। आजादी के बाद यह आसाम रेलवे  और  बम्बई के कानपूर-अछनेरा सेक्शन का हिस्सा हो गयी।  जो  आज  नॉर्थ-ईस्टर्न रेलवे  का अंग है।  काठगोदाम  रेलवे स्टेशन,  जो नैनीताल से  करीब 35 की.मी. दूर है,  तीन प्लेटफार्म और एक ब्रॉड-गेज की लाइन वाला, देश  के  खूबसूरत,  साफ़ - सुथरे रेलवे स्टेशनों में से एक है।  यहां  अभी सिर्फ डीजल इंजन के सहारे ही गाडी आती है।  पर जल्द ही  यहाँ  विद्युतीकरण होने वाला है। जिससे प्रदूषण में भी कमी आएगी। यह सच है कि सड़क मार्ग से अपने गंतव्य तक सीधे पहुंचा जा सकता है पर फिर भी एक बार यहां उतर कर इसके सौंदर्य को जरूर महसूस करना चाहिए। 

16 टिप्‍पणियां:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (27-10-2017) को
"डूबते हुए रवि को नमन" (चर्चा अंक 2770)
पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
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छठ पूजा की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

शास्त्री जी,
आभार

HARSHVARDHAN ने कहा…

आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन गणेश शंकर विद्यार्थी और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

हर्ष जी,
हार्दिक धन्यवाद

ब्लॉग बुलेटिन ने कहा…

ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, देश के सब से बड़े अनशन सत्याग्रही को ब्लॉग बुलेटिन का नमन “ , मे आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

Preeti 'Agyaat' ने कहा…

सुंदर, साफ़-सुथरा ..एकदम अलग

विकास नैनवाल ने कहा…

प्यारा सा स्टेशन। मैंने भी इसके विषय में काफी सुना है। एक बार तो जाऊँगा ही। देखें कब तक होता है। भारत के सारे स्टेशन इतने ही साफ़ हो जाएं तो मजा आ जाएगा।

Kavita Rawat ने कहा…

सच मन को अच्छा लगता है साफ़ सुथरा रेलवे स्टेशन देखकर, वहीँ गंधे स्टेशन देख ऊबकाई आने लगती है
बहुत अच्छी प्रेरक प्रस्तुति

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

ब्लॉग बुलेटिन, आपका हार्दिक धन्यवाद

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

प्रीति जी, कुछ अलग सा पर सदा स्वागत है

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

विकास जी, ऐसी जगह प्रतीक्षा भी खलती नहीं है

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

कविता जी, गंदगी का मुख्य कारण हद से ज्यादा भीड़-भाड़ ही है और कुछ हमारी लापरवाहियां भी हैं। पर ऐसी जगहें सुकून देती हैं।

sweta sinha ने कहा…

बहुत सुंदर विवरण काठगोदाम का
दिया आपने गगन जी,साथ में बहुत ही प्यारी तस्वीरें भी है।

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

श्वेता जी,
हार्दिक धन्यवाद

Indian Sex Bazar ने कहा…
इस टिप्पणी को एक ब्लॉग व्यवस्थापक द्वारा हटा दिया गया है.
विकास नैनवाल ने कहा…

जी सही कहा।

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