बुधवार, 21 जून 2017

हाथ ना हों तो तकदीर तो हो सकती है पर "आधार कार्ड" नहीं बन सकता !

कहने-सुनने में तो रोज ही करोड़ों के कर्जे के माफ़ होने को आता है पर जब ऐसे लोगों की हालत सामने आती है तो लगता है कि यह सब चोंचले भी समृद्ध व समर्थ लोगों के काम ही आते हैं। अरे जब एक गरीब का आधार कार्ड नहीं बन पा रहा तो वह कर्ज माफ़ी की दसियों कागजी कार्यवाहियों से कैसे पार पा सकेगा !! 

*हाथों की लकीरों पर बराबर विश्वास नही करना चाहिए,
तक़दीर तो उनकी भी होती है जिनके हाथ नही होते।   

जिसने भी यह उक्ति लिखी होगी उसका पाला भारत के  सरकारी दफ्तरों के अपाहिज नियमों को पत्थर की लकीर मानने वाले लकीर के फ़क़ीर कारकूनों से नहीं पड़ा होगा। नाहीं उसने लाल फीताशाही जैसे सर्प का नाम सुना होगा जो दफ्तर की फाइलों पर कुंडली मारे पड़ा रहता है जिसके डर से सालों-साल उन फाइलों पर काम नहीं हो पाता। 

आज ही अखबार में एक खबर पढ़ी कि उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के सालामाबाद गांव के रहने वाले सीताराम नाम के किसान, जिनका दायां हाथ एक हादसे का शिकार हो गया था, का आधार कार्ड इसलिए नहीं बनाया जा रहा क्योंकि उनके दाएं हाथ की ऊँगलियाँ नहीं हैं। आधार कार्ड बनाने वालों का कहना है कि बिना दाएं हाथ की ऊँगलियों की छाप के यह कार्ड नहीं बन सकता। अपनी पत्नी मुन्नी के साथ जमीन के एक छोटे
से टुकड़े पर गुजरा करने वाले सीताराम जी को अब यह डर भी सता रहा है कि बिना आधार के कहीं उनकी पेंशन भी ना रोक दी जाए। जबकि अभी भी वह पिछले कई सालों से गरीबी के कारण दूसरा बैल न होने की वजह से हल को अपने कंधो पर रखकर खेत जोतने पर मजबूर हैं। सरकार की तमाम योजनाओं के बावजूद भी बुज़ुर्ग किसान तक यदि कोई मदद नहीं पहुंची है तो दोष किसका है ? 

सुना है कि अखबारों में इस दंपत्ति की फोटो छपने पर मुख्य मंत्री योगी आदित्य नाथ जी ने हर संभव सहायता देने का आश्वासन दिया है। अच्छा होता कि मौके पर ही कोई एक्शन ले लिया जाता। जिससे लोगों के मन में सरकार के प्रति थोड़ी आस्था बढ़ती। क्योंकि लोगों में धारणा गहरे पैठी हुई है कि आश्वासन तो मिलते ही रहते हैं अमल कब होता है। वैसे भी दफ्तरों की सदी-गली सालों-साल चली आ रही प्रणालियों को बदलने पर पहले ध्यान दिया जाना चाहिए। जिससे सर्वहारा को भी योजनाओं का लाभ मिल सके नहीं तो किसी का ध्येय कितना भी पवित्र हो उसका फ़ायदा सक्षम लोग ही ले उड़ते रहेंगे। 

कहने-सुनने में तो रोज ही करोड़ों के कर्जे के माफ़ होने को आता है पर जब ऐसे लोगों की हालत सामने आती है तो लगता है कि यह सब चोंचले भी समृद्ध व समर्थ लोगों के काम ही आते हैं। अरे जब एक गरीब का आधार कार्ड नहीं बन पा रहा तो वह कर्ज माफ़ी की दसियों कागजी कार्यवाहियों से कैसे पार पा सकेगा !! 
क्या माननीय योगी आदित्यनाथ जी इस ओर ध्यान देंगे ?   

2 टिप्‍पणियां:

HARSHVARDHAN ने कहा…

आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन 21 जून अंतरराष्ट्रीय योग दिवस और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

हर्षवर्धन जी,
हार्दिक आभार।

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