बुधवार, 20 अप्रैल 2016

पड़ना असर थम्स-अप का सलमान पर

जिस तरह अभिनय सम्राट दिलीप कुमार दुखांत फ़िल्में करते-करते उनके आदी हो कुछ गमगीन से रहने लगे थे, ठीक वैसा ही हाल सलमान का इस विज्ञापन को करने के कारण हुआ है। पेय के जबरदस्त स्वाद और फ्लेवर के कारण वे इसको अपने से अलग नहीं कर पा रहे हैं। इसलिए यह जरूरी है कि पेय के निर्माता द्वारा सलमान के साथ एक आदमी स्थाई तौर पर  नियुक्त किया जाए जो हर समय उनको होने वाली आपूर्ति पर नजर रखे।  जिससे लाखों-करोड़ों दर्शकों के इस चहेते को अपनी जान जोखिम में डालने की जरुरत ना पड़े......... 

जानकारों, डाक्टरों, विशेषज्ञों आदि का कहना है कि आदमी को अपने जीवन में किसी ना किसी हॉबी को जरूर अपनाना चाहिए।  यह किसी भी चीज की हो सकती है, खेलने की, घूमने की, खाने की, बागवानी की, जानवर पालने की यानि किसी भी तरह की हॉबी किसी में भी पल सकती है। हॉबी को हिंदी में शौक और उसे रखने वाले को शौकीन कहते हैं। शौकीन शब्द को हिंदी में कुछ अच्छी नज़रों से नहीं देखा जाता इसीलिए हमारी नई पीढ़ी ने शौक की जगह हॉबी पालना बेहतर समझा। पर शौक हो या हॉबी, उसकी फितरत है कि वह धीरे-धीरे आदत में बदल जाती है। अब आदत का मतलब लत भी होता है और   हमारे पुराने बुजुर्ग कह गए हैं   कि  लत किसी भी
चीज की बुरी ही होती है। इस बात की सच्चाई को जानने के लिए कुछ सर्वे करने की सोची गयी और इसके लिए ऐसे लोगों को चुना गया जो लोकप्रिय हों, प्रतिष्ठित हों और शहर और गांव सब जगह उनकी पहचान हो। 

तो सबसे पहले सर्वे टीम में जो नाम बिना किसी विरोध के उभर कर सामने आया वह था, हिंदी फिल्म जगत के हातिमताई, सबके चहेते, सलमान खान का। चूंकि परदे पर कहानी का पात्र अभिनय करता है, और सर्वे का उद्देश्य "लत" की कहावत की सच्च्चाई को परखना था, इसलिए सारा ध्यान सलमान द्वारा किए गए विज्ञापनों पर, क्योंकि वहां सलमान ही सलमान के रूप में होते हैं, केंद्रित कर आजकल के एक बहुप्रसारित विज्ञापन को चुना गया। गहरे विश्लेषण, खोज और तहकीकात के बाद जो सच सामने आया वह आश्चर्यजनक रूप से कहावत की सच्चाई सिद्ध करता था कि, लत कोई भी अच्छी नहीं होती।
  
यह बात प्रमाणित हुई सलमान के "थम्स-अप" के विज्ञापनों का विश्लेषण करने पर। इस पेय का प्रचार उन्होंने 2002  में शुरू किया था जो अनुबंध समाप्त होने पर बंद हो गया था। इस विज्ञापन को करने के दौरान उन्हें बार-बार इसे पीना पड़ता था और उसके बेहतर स्वाद के कारण वह उन्हें इतना पसंद आ गया था कि मौका मिलते ही उन्होंने फिर उसकी मशहूरी करनी प्रारंभ कर दी। शुरू में तो सब ठीक रहा, अपने दोस्त-मित्रों के साथ दूकान, पार्टी, मॉल वगैरह में जाना थम्स-अप की मांग करना, पीना-पिलाना, पेय की अच्छाइयों को बताना इत्यादि। उनके विज्ञापन से इसकी मांग इतनी बढ़ गयी कि सलमान को भी इसकी कमी का सामना करना पड़ने लगा। तो वे जहां भी इसकी कमी देखते या स्टॉक ख़त्म पाते वहां किसी ना किसी तरह उसे लेकर ही आते और आपूर्ति होने के बाद वहाँ अपनी प्यास बुझाते थे।
फिर चाहे वह कोई दुकान हो, कालेज हो, मॉल हो या पार्टी हो।  उनके द्वारा येन-केन-प्रकारेण की गयी इसकी आपूर्ति की कोशिशों को भी दर्शकों ने हाथों-हाथ लिया। सब कुछ सब को पसंद भी आ रहा था पेय की खपत और लोगों में उसकी मांग भी बढ़ रही थी। पर  किसी ने सल्लू भाई पर इसके पड़ते असर को नहीं आंका। वह बेचारे सब को खुश करने की चाहत में इसकी लत लगा बैठे। सर्वे टीम ने यह बात उनके ताजा विज्ञापन में नोट की, जिसमें स्टॉक ख़त्म होने की बात सुन अपने साथी पर भी ध्यान ना देते हुए, बढ़ी  हुई दाढ़ी और गमगीन चेहरे पर उदास सी मुस्कान के साथ सागर, पहाड़, ऊबड़-खाबड़ राह को नजरंदाज करते हुए अपनी जान को जोखिम में डाल, चलते ट्रक से, बिना उसकी कीमत अदा किए जिस तरह थम्स-अप उठाते हैं वह खतरनाक और नैतिकता के विरुद्ध तो है ही, उसके लिए उनकी दीवानगी  भी चिंताजनक है।

अभियान पूरा होने और कहावत सही सिद्ध होने के उपरांत सर्वे टीम के सदस्यों ने, जो लाखों लोगों की तरह सलमान के जबरदस्त प्रशंसक हैं, देश-विदेश में विशेषज्ञों से सलाह की।   जिसका निष्कर्ष यह निकला कि
जिस तरह अभिनय सम्राट दिलीप कुमार दुखांत फ़िल्में करते-करते उनके आदी हो कुछ गमगीन से रहने लगे थे, ठीक वैसा ही हाल सलमान का इस विज्ञापन को करने के कारण हुआ है। पेय के जबरदस्त स्वाद और फ्लेवर के कारण वे इसको अपने से अलग नहीं कर पा रहे हैं। इसलिए यह जरूरी है कि पेय के निर्माता द्वारा सलमान के साथ एक आदमी स्थाई तौर पर  नियुक्त किया जाए जो हर समय उनको होने वाली आपूर्ति पर नजर रखे।  जिससे लाखों-करोड़ों दर्शकों के इस चहेते को अपनी जान जोखिम में डालने की जरुरत ना पड़े। प्रस्ताव सर्व-सम्मति से पास हो गया है और सलमान को भी इसकी सूचना दे दी गयी है। 

4 टिप्‍पणियां:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (23 -04-2016) को "एक सर्वहारा की मौत" (चर्चा अंक-2321) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

जमशेद आज़मी ने कहा…

सलमान खान के थ्‍म्स अप के विज्ञापन का बहुत ही अच्छा विश्लेषण किया है आपने। मुझे आपका यह लेख बहुत ही रोचक लगा।

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

शास्त्री जी, आभार

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

जमशेद जी, स्वागत है