मंगलवार, 25 अप्रैल 2017

ऑर्गेनिक के नाम पर कहीं यह भरमाने का प्रयास तो नहीं ?

जब पतंजलि की तरफ से इजाजत नहीं मिली है तो फिर कैसे ये लोग उसके नाम और लोगो का इस्तेमाल कर रहे है। ऐसा तो नहीं कि उन्होंने सोच रखा हो कि इजाजत मिलने में तो समय लगेगा ही तब तक उनके नाम का इस्तेमाल करते रहो, पब्लिक को क्या पता कि अधिकृत हैं की नहीं, वह तो नाम देखती है, यदि इजाजत ना भी मिली तब तक पब्लिक को आदत पड़ चुकी होगी !!  
पिछले कुछ दिनों से मीडिया पर #पतंजलि-के-नाम-का-रेस्त्रां खुलने की खूब चर्चा हो रही है। जिसे अपने आप को बाबा रामदेव का अनुयायी कहने वाले दो  सज्जनों द्वारा "पौष्टिक" नाम से पंजाब के जीरकपुर इलाके में खोला गया है। उनका दावा है कि उनके द्वारा सिर्फ पतंजलि के उत्पाद ही उपयोग में लाए जाते हैं। वैसे तो उनके अनुसार अभी बाबा रामदेव की तरफ से हरी झंडी नहीं मिली है, जिसके लिए उन्होंने आवेदन कर रखा है, फिर भी उनके रेस्त्रां में हर जगह बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण के फोटो के साथ-साथ पतंजलि के उत्पादों से दीवालें सजी पड़ी हैं, यहां तक की उनके मेनू-कार्ड पर भी पतंजलि का 'लोगो' लगा हुआ है। 

आज हर आदमी स्वास्थ के प्रति जागरूक होने लगा है। उसका रुझान ऑर्गेनिक यानी प्राकृतिक वस्तुओं की तरफ बढ़ता जा रहा है। इसी मनोवृत्ति का फ़ायदा व्यवसायिक वर्ग उठाने में लगा हुआ है। FMCG बनाने वाली हर कंपनी हर दूसरे दिन कोई न कोई नया पदार्थ "आर्गेनिक" का ठप्पा लगा बाज़ार में उतार देती है। पर इनमें से अधिकांश पर सिर्फ ठप्पा ही लगा होता है जो सिर्फ लोगों को भरमाने का ही काम करता है। इसका मुख्य कारण पतंजलि के वे उत्पाद हैं जिन्होंने देसी-विदेशी हर उपभोक्ता वस्तुओं को बनाने वाली कंपनियों के नाक के नीचे से बाजार खींच कर उस पर कब्जा कर लिया है। पतंजलि और बाबा रामदेव का नाम बाजार में "हॉट केक" बना हुआ है। लोग आँख बंद कर उनके उत्पादों का उपयोग करने लग गए हैं। शहर-शहर, गांव-गांव, गली-गली पतंजलि के उत्पादों की दुकानें खुल चुकी हैं। छोटे-बड़े हर घर में उसकी उपस्थिति दर्ज है। उनके नाम से हर कोई जुड़ना 
चाहता है। उसकी लोकप्रियता का फायदा उठाने के लिए लालायित हो रहा है। इसीलिए इस रेस्त्रां पर भी तुरंत भरोसा करने का मन नहीं हो पा रहा। हो सकता है कि इसके संस्थापकों की मंशा जन-हित की ही हो पर इससे नकारा भी नहीं जा सकता कि आज के समय में सिर्फ संस्था का नाम उपयोग कर लोगों को आकर्षित कर अपने को सफल करने का प्रयास किया जा रहा हो। आज जहां बाजार आर्गेनिक-आर्गेनिक के खेल में दस की चीज को सौ का बता खपाने में माहिर है। वहीँ आम-जन अपनी सेहत को लेकर कुछ भी खर्च करने को तत्पर नजर आता है। इसलिए शक की गुंजायश कुछ ज्यादा ही हो रही है।   

#पतंजलि_को_ब्रांड_बनने_और_लोगों_का_विश्वास_जीतने_में_वर्षों_का_समय_और_मेहनत_लगी_है। आज वह जिस मुकाम पर है वहां उन्हें किसी भी चीज के लिए किसी का मुंह जोहने  की जरुरत नहीं है। वे आज इतने सक्षम हैं कि पतंजलि के नाम से पांच सितारा होटलों की श्रृंखला खोली जा सकती है। इसलिए उन्हें इस तरह के किसी भी प्रस्ताव और प्रस्तावित करने वाले की मंशा को बहुत सोच-समझ कर ही स्वीकार करना चाहिए। क्योंकि साख बनाने में सालों लग जाते हैं उसे मिटने में वक्त नहीं लगता। इस रेस्त्रां की एक और बात खटकने वाली है कि जब पतंजलि की तरफ से इजाजत नहीं मिली है तो फिर कैसे ये लोग उसके नाम और लोगो का इस्तेमाल कर रहे है। ऐसा तो नहीं कि उन्होंने सोच रखा हो कि इजाजत मिलने में तो समय लगेगा ही तब तक उनके नाम का इस्तेमाल करते रहो, पब्लिक को क्या पता कि अधिकृत हैं की नहीं, वह तो नाम देखती है, यदि इजाजत ना भी मिली तब तक पब्लिक को आदत पड़ चुकी होगी !!  जिसका फ़ायदा तो मिलता ही रहेगा !!!

6 टिप्‍पणियां:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल गुरूवार (27-04-2017) को पाँच लिंकों का आनन्द "अतिथि चर्चा-अंक-650" पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना चर्चाकार का नैतिक कर्तव्य होता है।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

HARSHVARDHAN ने कहा…

आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन 97वीं पुण्यतिथि - श्रीनिवास अयंगर रामानुजन और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

शास्त्री जी, स्नेह बना रहे

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

हर्ष जी,
हार्दिक धन्यवाद

Jyoti Dehliwal ने कहा…

मैने भी इस बारे में व्हाट्स एप पर पढ़ा था कि ऐसा रेस्तरा खुला है। सच्चाई बताने के लिए धन्यवाद। जिसका नाम एक बार चल गया लोग उसका फ़ायदा उठाने लगते है।

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

ज्योति जी,
सदा स्वागत है