गुरुवार, 17 सितंबर 2015

भले ही गुलगुले से परहेज करें पर गुड़ जरूर खाएं

ढेर सारे गुणों के बावजूद शहरवासी या तथाकथित आधुनिक युवा उचित जानकारी के अभाव में गुड़ का उपयोग करने से कतराते हैं। जबकि यह चीनी से कहीं ज्यादा सुरक्षित और फायदेमंद है। तो अब बेझिझक गुड़ खाएं भले ही गुलगुले से परहेज करें। 

प्रकृति और इंसान के आपसी ताल-मेल की अद्भुत उपज है, गुड़। धरा ने आदमी की मेधा की परख के लिए द्रव्य रूप में अमृत रूपी रस को डंडों में भर खेतों में उपजाया तो इंसान ने उसे ठोस रूप दे एक बहुगुणी वस्तु की शक्ल दे दी। वस्तु भी कैसी, जिसका उपयोग वर्षों तक शादी-ब्याह, तीज-त्यौहार, तथा शुभ अवसरों पर मिठाई के रूप में होता रहा। हालांकि इसके और शुद्ध रूपों की ईजाद, शक्कर तथा चीनी के रूपों में हुई पर उनमे इसके लाभकारी गुणों का समावेश नहीं हो पाया। 

गुड़ की भेली 
चिकित्सा शास्त्र भी मानता है कि गुड़ इंसान के अलावा जानवरों के लिए भी गुणकारी है। यह स्वादिष्ट होने के साथ-साथ सेहत का भी ख्याल रखता है । गुड का सेवन करने से पाचन तंत्र सही रहता है । यह गन्ने के रस से तैयार किया जाता है, जिसकी फसल जाड़ों में होती है, उसी समय गुड बनाया जाता है। वैसे तो यह सर्दियों का मेवा है और इसकी तासीर भी गर्म होती है फिर भी उचित मात्रा में इसका सेवन साल भर किया जा सकता है। इसमे पाए जाने वाले महत्वपूर्ण खनिजों के कारण इसके अनेकों औषधीय लाभ हैं। 

इसका उचित मात्रा में सेवन पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है। भोजन को पचाने में सहायता करता  है। भूख बढ़ाता है। पेट की व्याधियों से मुक्ति दिलाता है। इसका लौह-तत्व शरीर को अनीमिया से बचाता है। यादाश्त तेज करता है। खून को साफ कर रक्त-चाप सामान्य बनाए रखने में सहायता करता है। आँखों के लिए भी बहुत फायदेमंद है।हड्डियों को मजबूती प्रदान करता है। यह ऊर्जा का स्रोत है। ठंड में शरीर का तापमान बनाए रखता है। सर्दी-खांसी, दमा और एलर्जी में भी फायदेमंद है। कहते हैं कि हर रोज़ गुड के साथ अदरक का सेवन करने से जोड़ो के दर्द में आराम मिलता है। इसे खा कर दूध पिया जा सकता है पर दूध में मिला कर पीने की मनाही है। वैद्याचार्यों के अनुसार रात के भोजनोपरांत इसकी एक तोला मात्रा ले लेने से इसके फायदे प्राप्त हो जाते हैं। 
खजूर का गुड़ 

गुड़ का स्वाद, गुण, और विशेषता बहुत कुछ इसको बनाने वाले की कार्यकुशलता पर निर्भर करती है। नहीं तो इसका हाल भी "सौदागर" फिल्म की पद्मा खन्ना के बनाए गुड़ जैसा हो जाता है। वैसे तो ईख के रस से बने गुड का ही ज्यादातर उपयोग होता है, पर हल्की या कुछ कम मिठास को पसंद करने वालों के लिए खजूर के रस से बना गुड़ बेहतरीन विकल्प है। अपने यहां यह ज्यादातर बंगाल और दक्षिणी भारत में बनाया जाता है। जहां इसका उपयोग त्यहारों इत्यादि पर खूब किया जाता है।    

प्राचीनता का इतिहास और इतने सारे गुणों के बावजूद शहरवासी या तथाकथित आधुनिक युवा उचित जानकारी के अभाव में इसका उपयोग करने से कतराते हैं। जबकि यह चीनी से कहीं ज्यादा सुरक्षित और फायदेमंद है। तो अब बेझिझक गुड़ खाएं भले ही गुलगुले से परहेज करें।    

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