शुक्रवार, 9 सितंबर 2011

शिवजी और माता पार्वती को ही अपने पुत्र से मिलने दक्षिण जाना पड़ता है।

यह कहानी बच्चों को सिखाती है अपने माता-पिता का अज्ञाकारी होना, उनका आदर करना, उनको सदा खुश रखना पर कहीं ना कहीं एक कसक भी छोड़ जाती है।

बचपन में चंचल तथा छोटे होने के कारण भगवान शिव तथा माता पार्वती, श्री गणेशजी का ध्यान तथा ख्याल रखते थे। कुछ दिनों तक तो ठीक रहा पर धीरे-धीरे कार्तिकेयजी को लगने लगा कि उनकी उपेक्षा हो रही है और पिता-माता उन्हें कम चाहते हैं। यह बात उन्होंने शिवजी से कही। प्रभू ने उन्हें समझाया कि ऐसी बात नहीं है तुम दोनों समान रूप से हमें प्यारे हो। पर कार्तिकेयजी को तसल्ली नहीं हुई। वे अनमने से, उदास से रहने लगे। बात बनती ना देख शिवजी ने माता पार्वती से सलाह कर इस गुत्थी का एक हल निकाला। उन्होंने सब को बुला कर कहा कि जो भी पृथ्वी के तीन चक्कर लगा उस पर स्थित सारे तीर्थों की परिक्रमा कर सबसे पहले हमारे पास आएगा उसे ही गणनायक की उपाधि दी जाएगी और वह सबसे सम्मान पाने का हकदार होगा।

निश्चित दिन और समय पर सारे देवी-देवताओं, ऋषि-मुनियों की उपस्थिति में, प्रभू का इशारा पाते ही कार्तिकेयजी अपने वाहन मोर पर सवार हो धरा की परिक्रमा करने निकल पड़े। इधर गणेशजी पेशोपेश में थे। एक तो उनका भीमकाय शरीर दूसरा अदना सा चूहा, जिस पर सवार हो यदि वे निकलते तो एक ही चक्कर लगाने में उन्हें हफ्तों लग जाते। पर वे विवेकशील, विद्यावान तथा ग्रन्थों के ज्ञाता थे। जिनमें बताया गया है कि माता-पिता के दर्शन सारे तीर्थों के दर्शन से मिलने वाले पुण्य से भी ज्यादा फल देते हैं। ऐसा याद आते ही उन्होंने शिवजी और माता पार्वती की तीन बार परिक्रमा की और उन्हें प्रणाम कर उनके चरणों में बैठ गये। सबने एक स्वर से उन्हें विजेता घोषित कर दिया।

कुछ समय पश्चात जब कार्तिकेयजी धरती की परिक्रमा कर वापस आए और उन्हें इस बात का पता चला तो वे बहुत खिन्न हो गये। उन्होंने उसी समय घर त्यागने की घोषणा कर दी। सब के बहुत समझाने पर भी वे नहीं माने और कैलाश छोड़ दक्षिण दिशा में रहने चले गये और फिर कभी लौट कर घर नहीं आए। शिवजी और माता पार्वती को ही अपने पुत्र से मिलने दक्षिण जाना पड़ता है।

3 टिप्‍पणियां:

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

चलिये, इसी बहाने उत्तर दक्षिण भ्रमण होता रहता है।

चैतन्य शर्मा ने कहा…

प्यारी बात बताती सुंदर कथा....

anshumala ने कहा…

कहानी तो पता थी पर ये नई जानकारी है की शिव पार्वती को उनसे मिलने दक्षिण जाना होता है |