मंगलवार, 29 सितंबर 2015

बलिहारी #BSNL की, अंतिम बार

लंच टाइम में तो सरकारी आदमी अपनी भी नहीं सुनता ! वह तो अच्छा है कि "भ्रामरी प्राणायाम" से दिमाग थोड़ा शांत रहने लग गया है। सज्जन ने  दो बजे की बजाए  पौने तीन बजे आ कर लोगों को उपकृत किया। पर इसी बीच वहां बैठी समय की पाबंद महिला ने मेरे काम की, जो महज दो-तीन मिनट का था, खानापूर्ति कर दी थी। कोहनी से हाथ जोड़ कर वापस आ गया..... 

#BSNL के भूमि-पकड़, अचल फोन को नमस्ते भेज दी है। हाथ जोड़ने का कारण जानने के लिए उन्होंने जो फॉर्म दिया उसमे वही सारे कारण थे जिनसे उपभोक्ता हलकान रहता है। आश्चर्य होता है और हंसी भी आती है कि अंदाजे के बावजूद सब कुछ वैसे ही बदस्तूर चला आ रहा है, सुधार की कोई कोशिश ही नहीं होती। 
सही दिशा निर्देश ना होने के कारण कल कनेक्शन कटवाने के लिए मुझे तीन घंटे और उनके दफ्तर के चार चक्कर लगाने पड़े। थोड़ी गलती तो थी, सो पहले फाफाडीह स्थित दफ्तर चला गया क्योंकि ज्यादातर काम वहीँ से होते हैं। वहां से बिन कुछ पूछे जय स्तंभ चौक का रास्ता  दिखाया गया, वहां पता चला कि मैं सिविल लाइन के क्षेत्र में पड़ता हुँ। वहां आधी कार्यवाही के बाद फिर  जय स्तंभ चौक आना पड़ा। वहां एक महिला कर्मचारी से मिली थोड़ी मदद की राहत तब तिरोहित हो गयी जब मेरे द्वारा जमा किया हुआ फार्म वहीँ के सज्जन से इधर-उधर होने पर वैसी ही क्लियरेंस को दोबारा सिविल लाइन से लाने को कहा गया।  इसके पहले कि खोपड़ी सटकती, कागज़ तो मिल गया पर डेढ़ बज गए। अब यह तो सबको पता है कि लंच टाइम में तो सरकारी आदमी अपनी भी नहीं सुनता !  सो मजबूरी थी। वह तो अच्छा है कि "भ्रामरी प्राणायाम" से दिमाग थोड़ा शांत रहने लग गया है। सज्जन ने  दो बजे की बजाए  पौने तीन बजे आ कर लोगों को उपकृत किया। पर इसी बीच वहां बैठी समय की पाबंद महिला ने मेरे काम की, जो महज दो-तीन मिनट का था, खानापूर्ति कर दी थी। दोनों महिलाओं को धन्यवाद दे, दफ्तर को कोहनी से हाथ जोड़ वापस आ गया। 

बार-बार प्रमाणित होती बात फिर एक  बार बता गयी कि क्यों निजी कंपनियां हर क्षेत्र में सफल हैं !! जिम्मेदार लोग क्यों ध्यान नहीं देते इस ओर ?  क्यों सरकारी महकमों में हर काम को जटिल बना कर रखा जाता है ? क्यों जो काम निजी कंपनियों में पांच मिनट में निपट जाता है उसमे सरकारी दफ्तर में चार घंटे लग जाते हैं ? क्यों  जो काम एक ही खिड़की से निपट सकता है उसके लिए आम आदमी को चार जगह दौड़ाया जाता है ? क्यों लंच समय को समय के बाहर तक खींचा जाता है ?

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