मंगलवार, 15 मई 2012

"बाबू मोशाय" .....यह कैसा विज्ञापन है रे


वर्षों पहले प्रसिद्ध फिल्म-निर्माता ऋषिकेश मुखर्जी ने एक बहुचर्चित क्लासिक फिल्म "आनंद" बनाई थी। इसके मुख्य कलाकार राजेश खन्ना तथा सहायक किरदार में अमिताभ बच्चन थे। फिल्म में राजेश अमिताभ को "बाबू मोशाय" कह कर संबोधित करते हैं। यह संबोधन उस समय काफी लोकप्रिय हुआ था। आज भी लोगों को यह याद है। 

मुखर्जी साहब ने अपनी अगली फिल्म "नमकहराम" में भी इन दोनों कलाकारों को दोहराया। थोडा सा "ग्रे शेड" होने के बावजूद अमिताभ, राजेश खन्ना पर भारी पडे और यहीं से उनका भाग्य भी अपने सहकर्मी पर  हावी  होता चला गया.  यहां तक कि राजेश खन्ना को धीरे-धीरे नेपथ्य में जाने पर  मजबूर होना पडा। 

समय बीतता गया। ना जाने कितना पानी गंगा में बह गया। राजेश खन्ना पूरी तरह से परिदृष्य से गायब हो गये। पर अमिताभ द्वारा अपने सिंहासन को हस्तगत कर अपने को अपदस्त करने का गम कभी भी भुला नहीं पाए। फांस की तरह यह बात उनके दिलो-दिमाग को सालती रही। अमिताभ ने भी काफी उतार-चढाव देखे। तन-मन पर चोटें खाईं। पर वक्त से समझौता कर जैसा भी काम मिला उसे बिना किसी हील-हवाले, बिना किसी हीन प्रवृत्ति का शिकार हुए, बिना किसी हीन ग्रंथी का शिकार हुए पूरे मनोयोग से पूरा किया। जिसका फल सबके सामने है। इसी सफलता को देख बहुत सारे भूतपूर्वों ने वर्तमान में हाजिरी लगाने की कोशिश की पर वैसी सफलता से महरूम ही रहे। 

आज का व्यवसाई बहुत चतुर हो गया है। संबंध, नैतिकता, जीवन मूल्य जैसी बातें उसके लिए कोई मायने नहीं रखतीं। वह हर काम, हर बात को सिर्फ अपने फायदे को ध्यान में रख करता है। ऐसे ही एक विज्ञापन और फिल्म निर्माता ने, जिसने अमिताभ को एक अनोखे किरदार में पेश कर नाम और दाम दोनों कमाए हैं, राजेश खन्ना को लेकर 'पंखों' की एक विज्ञापन फिल्म बनायी है। जिसमें खन्ना साहब अपने पुराने अंदाज में कबूतर की तरह गर्दन मटका कर विज्ञापन का अंतिम डायलाग बोलते हैं, "बाबू मोशाय मेरे 'फैन्स' को कोई मुझसे छीन  नहीं सकता।"  

"बाबू मोशाय", यह शब्द उनके दिल मे सालों से जमे नैराश्य, वैमनस्य, कुंठा, कुढन, ईर्ष्या जैसी भावनाओं को फिर जग के सामने ला खडा करता है। निर्माता द्वारा ऐसा जान-बूझ कर, सोच समझ कर पुराने द्वेष को भुनाने के लिए किया गया प्रयास है। नहीं तो 'अमर प्रेम' का "पुष्पा वाला डायलाग" भी काम में लाया जा सकता था। 

आज की पीढी को ना इन दोनों सुपर-स्टारों के इतिहास में दिलचस्पी है नाहीं उन दिनों की इनकी टकराहट की जानकारी। इसीलिए यह विज्ञापन निर्माता की भूल साबित हो कोई असर पैदा नहीं करता।






1 टिप्पणी:

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

हमें तो वह पंक्ति भुलाये नहीं भूलती है।