गुरुवार, 25 नवंबर 2010

पुलिस वाला, पुलिस वाला ही होता है :-)

आज हंगरी के प्रसिद्ध व्यंग्यकार 'फर्ज करंथी' की एक रचना पढने को मिली। अच्छी लगी सोचा आप सब को भी शायद पसंद आ जाए :

आज सबेरे दफ्तर जाते समय जरा लेट हो गया था सो दफ्तर के आगे बिना ट्राम के रुके ही कूद पड़ा था। इसके पहले कि मैं मुंह के बल जमीन पर लंबायमान होता एक सिपाही ने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे संभाल लिया। उसने मुझे स्नेह से देखा और बोला "घबराइए नहीं आप बिल्कुल सुरक्षित हैं। मैं ना पकड़ता तो आप घायल हो सकते थे।" उसने मधुर स्वर में मुझसे कहा।

उसकी दयालुता देख मेरी आंखों में पानी आ गया।
मैंने कहा "लोग नाहक ही पुलिस वालों को निर्मम, अत्याचारी, उद्दंड और अहंकारी समझते हैं, आप तो दया के साक्षात रूप हैं।"

मैंने गरमजोशी और भावुकता से उसका हाथ देर तक पकड़े रखा। फिर बोला "आपका एक बार फिर बहुत-बहुत धन्यवाद मैं आज की घटना और आपको कभी नहीं भूलूंगा। आपका शुभ नाम ?

"जीनस वार्गा.....श्रीमान।"
पर अजीब बात थी वह मेरा हाथ छोड़ नहीं रहा था। जब मैंने छुड़वाना चाहा तो उसने कहा "ठहरिए श्रीमान... अभी हमारी बात खत्म नहीं हुई है। क्या मैं आपका नाम जान सकता हूं?"
इसी बीच उसने अपनी नोट बुक निकाल ली और पुछने लगा
"हां श्रीमान...आपका पता?....उम्र?...जन्म तिथि?....शरीर पर कोई शिनाख्ति निशान?

"अरे!!! तो तुम क्या मेरी रिपोर्ट करना चाहते हो?" मैंने विस्मय से पूछा।

"तो आपका क्या ख्याल था कि मैं आपसे मनोविनोद कर रहा था इतनी देर से, क्योंकि आप चलती ट्राम से छलांग मार कर उतरे थे ?"

5 टिप्‍पणियां:

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

भारत में पहले चार जमाता, फिर मां बहन से सम्बन्ध स्थापित करता और बाद में हजार दो हजार रुपये ऐंठ लेता..

anshumala ने कहा…

भारत में तो वो आप को संभालता ही नहीं बस चुप चाप खड़ा हो कर देखता जब आप अपने धुल झाड कर खड़े होते तो वही करता जो भारतीय नागरिक जी ने कहा है |

Rahul Singh ने कहा…

बढि़या किस्‍सा है, लेकिन हर तरह के लोग हर जगह होते हैं, पुलिस में, देश में, विदेश में.

arvind ने कहा…

farz karthi ki rachna bahut acchhi lagee,,,,aapko aabhaar.

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

रोचक किस्सा है.... वैसे यह सच है की हमारे यहाँ आमतौर ऐसा नहीं होता ......