रविवार, 18 अप्रैल 2010

"बैंक" जहां पैसे नहीं कपडे रखे जाते हैं.

ज्यादातर यही समझा जाता है कि बैंकों में पैसा या कीमती सामान ही रखा जाता है। पर झारखंड के जमशेदपुर मे एक बैंक ऐसा है जिसका पैसों से कोई लेना-देना नहीं है। इस अनोखे बैंक में इंसान की मूलभूत जरूरत कपड़े रखे जाते हैं तथा इसे कपड़ों के बैंक के नाम से जाना जाता है।

करीब एक दशक से ज्यादा पुराने इस बैंक "गूंज" का मुख्य उद्देश्य देश के उन लाखों गरीब तथा जरूरतमंद लोगों को कपड़े उपलब्ध करवाना है, जो उचित वस्त्रों के अभाव मे अपमान और स्वास्थ्य संबंधी जोखिम का सामना करते हैं। पूरी दुनिया में अनगिनत लोगों को कपड़ों के अभाव में शारिरिक व मानसिक पीड़ा का सामना करना पड़ता है। भारत के ही कुछ भागों में महिलाओं को उचित वस्त्रों के अभाव में अनेकों बार अप्रिय परिस्थियों से गुजरना पड़ता है। इसी तरह की परेशानियों से लोगों को रोज दो-चार होता देख, कुछ लोगों का मिल कर इसका हल निकालने की सोच ने जो रूप लिया वही है "गूंज"। इसी तरह यदी छोटी-छोटी धाराएं अस्तित्व में आती रहें तो गरीबी के रेगिस्तान में कहीं-कहीं तो नखलिस्तान उभर कर कुछ तो राहत प्रदान कर ही सकता है। सिर्फ मन में सर्वहारा क लिए सच्चा प्रेम तथा उनके लिए कुछ कर गुजरने की भावना होनी चाहिए।

8 टिप्‍पणियां:

M VERMA ने कहा…

दिलचस्प जानकारी

राज भाटिय़ा ने कहा…

बहुत सुंदर, वेसे हमारे देश मै भी होना चाहिये कि जो कपडे हमे नही उन्हे एक जगह एक्त्र किया जाये ओर फ़िर उन्हे चाहिये साफ़ कर के धो कर जरुरत मंद लोगो को दे देने चाहिये बिलकुल फ़्रि मै

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

हमारे लिए विल्कुल नई जानकारी है!

मनोज कुमार ने कहा…

रोचक।

P.N. Subramanian ने कहा…

बहुत मुश्किल है ऐसा कुछ कर पाना हालाकि कुछ स्वयं सेवी संस्थाएं हैं जो पुराने कपडे इकठ्ठा कर गरीबों में वितरित करती है. यहाँ तो घर की महिलाएं बर्तन वाली बायीं को कपडे देकर बदले में स्टील के बर्तन लेने में अधिक उत्सुक रहती हैं.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस सुन्दर पोस्ट की चर्चा यहाँ भी तो है!
http://charchamanch.blogspot.com/2010/04/blog-post_19.html

हिमांशु । Himanshu ने कहा…

सुन्दर जानकारी ! आभार ।

Dharmendra ने कहा…

Interesting! I am unaware of such type of good initiatives taken by our natives. As Jamshedpur is my home town.
Shayad mere jaise logon ke liye hi kaha gaya hai - "kabhi ghar pe bhi raha kijiye, hamesh ghoomte mat rahiy".