गुरुवार, 25 मार्च 2010

तीन टायलेटी चुटकले।

चलती गाड़ी में अपने शरीर का कोई अंग बाहर न निकालें :)

1, ट्रेन में बैठे श्रीमान जी काफी परेशान थे। बार-बार कसमसा कर पहलू बदल रहे थे। चेहरे पर बैचैनी साफ झलक रही थी। उनकी हालत देख सहयात्री ने पूछा, परेशान लग रहे हैं, कोई तकलीफ है?

हां, टायलेट जाना है। श्रीमान जी ने जवाब दिया।

तो जाते क्यों नहीं? साथ वाले ने पूछा ।

ट्रेन जो चल रही है। श्रीमान जी बोले।

तो उससे क्या होता है? सहयात्री कुछ समझ ना पाया।

वहां लिखा है, चलती गाड़ी मे अपने शरीर का कोई अंग बाहर ना निकालें। श्रीमान जी ने अपनी परेशानी का कारण बताया।


2, बंता ट्रेन में टायलेट जाकर लौटा तो बदहवास था। सहयात्री ने पूछा, क्या हो गया?
बंता बोला टायलेट के छेद से मेरा पर्स नीचे गिर गया।
अरे, तो चेन खींचनी थी ना। सहयात्री ने कहा।

दो बार खींची पर हर बार पानी बहने लगा।



3, रेलगाड़ी में एक बुजुर्गवार अपनी सीट से बार-बार उठ कर टायलेट जा रहे थे। कुछ परेशान भी थे। सहयात्री बार-बार उनके आने-जाने से तंग आ चुका था। अंत में उसने चिढ कर कह ही दिया, कि बाबा आपको "चैन" नहीं है?

है तो सही बेटा पर खुल नहीं रही है।

13 टिप्‍पणियां:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

nice pieces.

राज भाटिय़ा ने कहा…

क्या यह सब एक ही रेल मै बेठे थे जी..... बहुत सुंदर पहली बार पढे, बहुत नाईस ही नाईस है जी

zeashan zaidi ने कहा…

Ha ha ha

Vivek Rastogi ने कहा…

हा हा बहुत बढ़िया

डॉ महेश सिन्हा ने कहा…

:)

Harshad Jangla ने कहा…

Pleasant!!

-Harshad Jangla
Atlanta, USA

भूतनाथ ने कहा…

chhi....chhi.....gande.....!!

बनीराम मीणा ने कहा…

रेल मन्त्री को शिकायत हो जायेगी जरा संभल के लिखा करो

vivek shankar ने कहा…

chhi....chhi.....gande.....!!

बेनामी ने कहा…

और सँग्रह बढायेँ

बेनामी ने कहा…

वाह भाई

Brijesh ने कहा…

wah bhai kya majedar joke pes kiya...
chhi..chhi.........,

बेनामी ने कहा…

बहुत बढिया है