रविवार, 7 मार्च 2010

मधुशाला और झाडूवाला

यह कोई व्यंग नहीं है, जीवन की सच्चाई है, ऐसे बहुतेरे लोग होंगे जो बिना किसी गिले-शिकवे के अपने परिवार के प्रति समर्पित होंगे ....

मेरे इलाके में एक फेरी वाला वर्षों से अपनी सायकिल पर झाड़ू बेचने आता रहता है। दूसरे फेरीवालों की अपेक्षा इसकी आवज शांत, बुलंद और साफ है। दो गलियों की दूरी से भी इसकी आवाज "झाड़ू वाला" साफ-साफ सुनी और समझी जा सकती है। बहुतेरी बार आमने-सामने पड़ने पर मुझे सदा उसका चेहरा शांत और संतुष्ट ही लगा। धीरे-धीरे जवानी से बुढापे में प्रवेश करता यह शक्स अभी भी उसी बुलंद आवाज के साथ अपना व्यापार चलाए जा रहा है।

पिछले रविवार को घर की जरूरत की वजह से उसे बुलवाया गया तो मैं उसके बारे में कुछ जानने की इच्छा ना रोक सका। बातों ही बातों में उसने बताया कि उसकी बड़ी बेटी रेल्वे की परिक्षा दे नौकरी पा चुकी है और उसकी शादी भी हो गयी है। छोटा बेटा भी बैंक में काम कर रहा है। मेरे यह पूछने पर कि उसके बच्चों को लगता नहीं कि यह फेरीवाला काम कुछ…………
मेरी बात पूरी होते ना होते वह तुरंत बोला, नहीं साहब, मेरे बच्चे बहुत समझदार हैं। वे तो सगर्व लोगों को बताते हैं कि उनके पिता ने कितनी मेहनत कर उन्हें ऐसी जगह पहुंचाया है। शुरु-शुरु में बहुत तंगी और मुश्किलों का सामना करना पड़ा था, पर धीरे-धीरे सब ठीक होता चला गया और जिस काम ने मुझे और मेरे परिवार को खुशहाली देने में मदद की है उसे मैं कैसे छोड़ सकता हूं। जब तक शरीर साथ देता है तब तक यही काम करता रहूंगा। इतना कह वह नमस्ते कर आगे बढ गया अपने से ज्यादा अपने बच्चों के बारे में मुझे सोचता छोड़।

मैं सोच रहा था कि जब एक लायक बेटा यदि अपने पिता की शराब के वितरण स्थल को महिमा मंड़ित करने वाले भावों को सग्रव दुनिया के सामने पेश करता रह सकता है तो इस झाड़ू और उसके बेचने वाले की संस्तुति क्यों नहीं की जा सकती जो सदा सर्वदा घर, बाहर, दुनिया-जहान से गंदगी साफ करने को कटिबद्ध रहता है।

यह लेख सिर्फ एक इंसान के अपने परिवार के प्रति समर्पण और अपने कर्तव्य को पूरा करने के जज्बे को सामने रखने के लिए लिखा गया है। किसी दुर्भावना या पूर्वाग्रह से दूर रह कर।

8 टिप्‍पणियां:

anand ने कहा…

aaj bhi aise log milte hai jan kar ashchrya hua..

HARI SHARMA ने कहा…

विचार बहुत ही सुन्दर है

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

aisa bhi hota hai.

डॉ महेश सिन्हा ने कहा…

कर्मयोगी को साधुवाद

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi ने कहा…

दुनिया में कोई काम छोटा नहीं।

Jangbir Goyat ने कहा…

aise logo ke karan hi Bharat mahan hai na ki paiso wale se

राज भाटिय़ा ने कहा…

शर्मा जी इस कर्म योगी को सलाम, मै एक रिक्क्षा चलाने वाले की ज्यादा इज्जत करूंगा, एक नेता या अभिनेता के मुकाबले, दुनिया मै काम कोई भी छोटा नही जो मेहनत से किया जाये , रिशवत ओर हेरा फ़ेरी या चलाकी से ओर हरामी ढंग से किया काम ही गलत है

Anil Pusadkar ने कहा…

सलाम करता हूं आने काम के प्रति समर्पित उस पूरे परिवार को,जंहा काम को काम समझा जाता है छोटा या बड़ा नही।आपका भी आभार शर्मा जी ऐसे लोगों को सामने लाने के लिये जो वाकई समाज के लिये मिसाल हो सकते हैं मगर वे लोग खामोशी से अपना काम कर रहे हैं।

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