शनिवार, 19 दिसंबर 2009

आपके साथ भी ऐसा होता है क्या ? (:

* जब आप घर में अकेले हों और नहा रहे हों तभी फ़ोन की घंटी बजती है।

* जब आपके दोनों हाथ तेल आदि से सने हों तभी आपके नाक में जोर की खुजली होती है।

* जब भी कोई छोटी चीज आपके हाथ से गिरती है तो वहाँ तक लुढ़क जाती है जहाँ से उसे उठाना कठिन होता है।

* जब भी आप गर्म चाय या काफ़ी पीने लगते हैं तो कोई ऐसा काम आ जाता है जिसे आप चाय के ठंडा होने से पहले पूरा नहीं कर पाते।

* जब आप देर से आने पर टायर पंचर का बहाना बनाते हैं तो दूसरे दिन सचमुच टायर पंचर हो जाता है।

* जब आप यह सोच कर कतार बदलते हैं कि यह कतार जल्दी आगे बढेगी तो जो कतार आपने छोडी होती है वही जल्दी बढ़ने लगती है।

क्यों -----होता है क्या ? (: (: (:

16 टिप्‍पणियां:

गिरिजेश राव ने कहा…

मर्फी लॉ यही तो कहता है।

Vibha Rani ने कहा…

बिल्कुल होता है. अब इसमे कोई लॉ ना खोजें. लौ खोजें तो कोई उज़्र नहीं.

बी एस पाबला ने कहा…

हा हा!
गिरिजेश जी से सहमत :-)

बी एस पाबला

राज भाटिय़ा ने कहा…

पता नही जी

Gagan Sharma, Kuchh Alag sa ने कहा…

ये मर्फी है कौन ? नाम तो बहुत सुना है। पर इसने ला कैसे बनाया होगा। क्या सारी उल्टी-सीधी घटनायें उसी के साथ होती रही होंगी। (:

बी एस पाबला ने कहा…

रवि रतलामी जी ने मरफ़ी के बारे में कुछ जानकारियाँ दी हैं
देखिएगा

http://www.abhivyakti-hindi.org/vigyan_varta/pradyogiki/2007/murphylaw.htm

http://raviratlami.blogspot.com/2006/09/blog-post_115937882193573533.html

http://raviratlami.blogspot.com/2007/04/murphy-law-in-hindi.html

बी एस पाबला

संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari ने कहा…

वाह हमने तो मरफ़ी का रेडियो बस सुना था ये मरफी तो कमाल का कानून बनाया है जी.

शर्मा जी सचमुच में हमारे साथ भी ऐसा ही होता है.

ललित शर्मा ने कहा…

गगन शर्मा जी-आप मन के बुलाग मा आके आज अड़बड़ गियान पायेंव, पावला जी झटपट मर्फ़ी के लिंक ला दे दिस, गाड़ा-गाड़ा बधई

Neha Pathak ने कहा…

जब विधाता ने परेशान करने की ठान ली हो तो इंसान क्या कर सकता है??? :)

संगीता पुरी ने कहा…

ऐसा भी होता है .. और कभी कभी उल्‍टा भी होता है!!

हिमांशु । Himanshu ने कहा…

aksar hota hai ji !

pravishti ka abhar .

अजय कुमार झा ने कहा…

हां मुझे भी किसी ने कहा था कि जो जो मेरे साथ होता है ....वो किसी मर्फ़ी बर्फ़ी के साथ भी होता था ...अब आप सब भी वही कह रहे हैं तो मान लेता हूं ....हां ये ला भी बन गया ....ये तो कमाल की बात रही ..यानि अब कुल तीन जने हो गए ...आप , वो मर्फ़ी जी और मैं ...

Vivek Rastogi ने कहा…

हम सोचते हैं कि जिस पोस्ट को लोग ज्यादा पढ़ेंगे उसे ही पढ़ने पाठक नहीं आते हैं, और कोई पोस्ट जो ऐसे ही लिख दी वह हिट हो जाती है, कभी ऐसा भी होता है...

प्रीति टेलर ने कहा…

aisa agar na ho to jindagime kadva aur khatta rang kaise bhare ? aur jingagi me har rang hona hi chahiye ...baadmen yaad karke hansi aati hai ....

प्रवीण शाह ने कहा…

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@ बी एस पाबला जी,
धन्यवाद आपका,
मर्फी का नियम तो जानता था पर जीवन के हर क्षेत्र में उसका उदाहरण और विस्तार आपके दिये रवि रतलामी जी के लिंकों में मिला।

@ गगन शर्मा जी,

रवि रतलामी जी ने कहा है...
"मरफ़ियाना खयालात हों, बस. वे ही मरफ़ी के नियम बन जाते हैं. परंतु वे चाहे जितने अजीब हों, जीवन के सत्य के बहुत करीब होते हैं. :)"

आपके यह ऑब्जर्वेशन भी पूरे मरफ़ियाना ही तो हैं।

बेनामी ने कहा…

Nahi hamara sath aisa nahi hota
aisa isliye kyoki aapke saath wahi hota jo aapne socha tha
eg
late ho gaye to aap us bahane ko soch kar vaisei hi eak kalpnaatmak film banadete hai jo ki dusre ya teesre din sakar ho jati hai ya produce ho jati hai jaisa aap dirceted karte bilkul waise hi

valmiki ne bhi ramayan ki kaplna kar ke likh dali thi jo ki swyam hi sakar ho gai eak eak pal waisa hi or koi natak nahi reality main
shri ramtha