मंगलवार, 8 दिसंबर 2009

ये वो हैं जिनके बिना देशों की सुरक्षा दाँव पर लग सकती है.

आज किसी भी देश के लिये उसका गुप्तचर विभाग उसकी सेना का एक आवश्यक अंग बन चुका है। इसके बिना देश की सुरक्षा की कल्पना भी नहीं की जा सकती। हर देश का अपना गुप्तचर संगठन और प्रणाली है। अमेरिका और रूस जैसी बड़ी शक्तियों के बारे में तो अक्सर समाचार आते रहते हैं। इसीलिये उनकी गुप्तचर एजेंसियों का नाम सब को पता रहता है पर अन्य दूसरे देशों के बहुत से ऐसे संगठन हैं जो किसी भी मायने में किसी से कम नहीं हैं। इनमें से कुछ की जानकारी निम्नानुसार है।

सी.आई.ए. :- अमेरिका की यह संस्था दुनिया का सबसे बड़ा गुप्तचर संगठन है। इसका जाल सारे संसार में फैला हुआ है। परन्तु इसके कारण बहुत बार अमेरिका को बदनामी भी सहनी पड़ी है।

के.जी.बी. :- इसका पूरा नाम कामिटेट गोसुदस्त्रवेनाई बीजोपास्तनोस्ती है। इसका मुख्य काम रूस में कम्युनिस्ट शासन को मजबूत बनाना, देश की सीमाओं की देख-रेख तथा विदेशों में गुप्तचरी करना है। करीब दो लाख सदस्यों वाली यह संस्था हर तरह से सी.आई.ए. के समकक्ष है।

डी.जी.आई. :- क्यूबा की इस जासूसी संस्था को रूस की के.जी.बी. की कार्बन कापी माना जाता है। इसके अनेक ऊंचे पदों पर रुसी अधिकारी पदासीन हैं। इसका मुख्य काम अमेरिका समेत उसके सहायक देशों की जासूसी करना है।

सिक्योरिटि इंटेलिजेंस सर्विस :- कनाडा सरकार ने इसका गठन 1981 में किया था। यह “नाटो” की सहायता से अपना काम-काज करती है।

मोस्साद :- इजरायल का यह संगठन अपने आप में एक मजबूत एजेंसी है। इजरायल को सदा युद्धों का सामना करना पड़ता रहा है और उसमें इसकी प्रभावी भूमिका रही है।

सावाक :- ईरान की यह गुप्तचर संस्था कफी बदनाम रही है। 1956 में इसकी नींव सी.आई.ए. और मोस्साद ने मिल कर डाली थी। ईरान के शाह रजा पहलवी का इस पर वरद हस्त था। कहते हैं इसीके जुल्मों के कारण ईरान में क्रान्ति हुई थी।

एम15 और एम16 :- इन दो संगठनों का अस्तित्व ब्रिटेन में 1909 में आया। जहां अमेरिका के साथ मिल कर इन्होंने कफी नाम कमाया वहीं कयी असफलताओं ने इन्हें हंसी का पात्र भी बनाया है।

ए.एस.आई.ओ. :- आस्ट्रेलियन सिक्यूरिटी एंड इंटेलिजेंस आर्गनाइजेशन की नींव शीत युद्ध के दौरान आंतरिक सुरक्षा संगठन के रूप में डाली गयी थी। बाद में इसके दो भाग कर दिये गये। एक को देश में विदेशी जासूसों पर शिकंजा कसने का काम तथा दूसरे को देश में आंतरिक सुरक्षा बनाये रखने की जिम्मेदारी सौंप दी गयी।

रा :- हमारे इस संगठन को कफी सूझ-बूझ से चलाया जाता रहा। पर एक दिन इसको भी राजनैतिक कारणों से सबके सामने आना पड़ा। इसकी भी अपनी बहुत सी उपलब्धियां हैं।

पढने, सुनने देखने में (फिल्मों इत्यादि में) जासूस और उनके कारनामे चाहे कितने भी आकर्षक लगें पर सच्चाई यही है कि यह एक अलग तरह का संसार है। जिसकी अंधेरी सुरंगों से वापस लौटना बहुत मुश्किल होता है। दुनिया की नज़रों से दूर बिना किसी पहचान के, गुप्त जगहों में, गुप्त रह कर, गुप्त योजनाओं को कार्यान्वित करने वाले यह गुप्तचर हर समय कितने तनाव और आशंका में जीते हैं इसका अंदाजा भी आम आदमी नहीं लगा सकता। ऊपर से विड़ंबना यह है कि चाहे कितने भी बड़े काम को ये अंजाम दें, ना तो इनके नाम का किसी को पता चलता है और नही उसका कोई सार्वजनिक पारितोषिक इन्हें मिलता है।

4 टिप्‍पणियां:

हिमांशु । Himanshu ने कहा…

बहुत ही उपयोगी व महत्वपूर्ण जानकारी । आभार ।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बढिया जानकारी दी है आपने!

परमजीत बाली ने कहा…

बढिया जानकारी दी आभार।

शरद कोकास ने कहा…

इतनी गुप्त जानकारी... अच्छा है ।