बुधवार, 14 अक्तूबर 2009

राधा नौ मन तेल होने पर ही क्यूँ नाचेगी ?

एक मुहावरा है “ना नौ मन तेल होगा ना राधा नाचेगी”। अब सोचने की बात यह है कि राधा नाचेगी ही क्यूं ? बिना मतलब के तो कोई नाचता नहीं। तो कोई खास आयोजन होगा, पर यदि ऐसा है तो नौ मन तेल की शर्त क्यूं रखी गयी है ?
ऐसा लगता है कि ये राधाजी कोई बड़ी जानी-मानी डांसिंग स्टार होंगी और किसी अप्रख्यात जगह से उन्हें बुलावा आया होगा। हो सकता है कि उस जगह अभी तक बिजली नहीं पहुंची हो और वहां सारा कार्यक्रम मशाल वगैरह की रोशनी में संम्पन्न होना हो। इस बात का पता राधा एण्ड़ पार्टी को वेन्यू पहुंच कर लगा होगा और अपनी प्रतिष्ठा के अनुकूल हर चीज ना पा कर आर्टिस्टों का मूड उखड़ गया होगा और उन्होंने ऐसी शर्त रख दी होगी जिसको पूरा करना गांव वालों के बस की बात नहीं होगी। फिर सवाल उठता है कि नौ मन तेल ही क्यूं राउंड फिगर में दस या पन्द्रह मन क्यूं नहीं ? तो हो सकता है कि यह आंकड़ा काफी दर-मोलाई के बाद फिक्स हुआ हो।
ऐसा भी हो सकता है कि पेमेन्ट को ले कर मामला फंस गया हो। वहां ग्रामिण भाई कुछ नगद और कुछ राशन वगैरह दे कर आयोजन करवाना चाहते हों पर राधा के सचिव वगैरह ने पूरा कैश लेना चाहा हो। बात बनते ना देख उसने इतने तेल की ड़िमांड रख दी हो जो पूरे गांव के भी बस की बात ना हो।

तो मुहावरे का लब्बो-लुआब यह निकलता है कि एक विख्यात ड़ांसिंग स्टार अपने आरकेस्ट्रा के साथ किसी छोटे से गांव में अपना प्रोग्राम देने पहुंचीं। उन दिनों मैनेजमेंट गुरु जैसी कोई चीज तो होती नहीं थी सो गांव वालों ने अपने हिसाब से प्रबंध कर लिया होगा और यह व्यवस्था राधा एण्ड कंपनी को रास नहीं आयी होगी। पर उन लोगों ने डायरेक्ट मना करने की बजाय अपनी एण्ड़-बैण्ड़ शर्त रख दी होगी। जो उस हालात और वहां के लोगों के लिये पूरा करना नामुमकिन होगा। इस तरह वे जनता के आक्रोश और अपनी बदनामी दोनों से बचने में सफल हो गये होंगे। इसके बाद इस तरह के समारोह करवाने वाले और सारी व्यवस्थाओं के साथ-साथ नौ-दस मन तेल का भी इंतजाम कर रखने लग गये होंगे क्योंकि फिर कभी राधाजी और तेल के नये आंकड़ों की खबर नहीं आयी।
इस बारे में नयी जानकारियों का स्वागत है।

6 टिप्‍पणियां:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

सब अपनी बुद्धि के अनुसार अपना ही गज प्रयोग कर रहे हैं।

धनतेरस, दीपावली और भइया-दूज पर आपको ढेरों शुभकामनाएँ!

सतीश सक्सेना ने कहा…

दीपावली की शुभकामनायें !!

राज भाटिय़ा ने कहा…

हो सकता है राधा का बाप तेल का व्यापारी हो, ओर राधा सिर्फ़ तेल ले कर नाचती हो, अब नॊ मन अजी तेल भी कोई तॊल कर थोडे देता है नॊ सॊ सेर तेल होगा, बस यही गडबड हो गई ओर राधा नही नाची होगी, चलिये हमे क्या, नाचे या ना नाचे, अगर नाच भी पडी तो हमे क्या मिलेगा? लेकिन तेल कोन सा ???
आप को ओर आप के परिवार को दीपावली की शुभ कामनायें,

वन्दना अवस्थी दुबे ने कहा…

बहुत बढिया. ..शुभकामनायें बाद में.

Anil Pusadkar ने कहा…

दीपावली की शुभकामनाएं

GATHAREE ने कहा…

tal dene ka nayaab tareeka
badi purani parampara hai