शनिवार, 5 सितंबर 2009

सीकरी, फर्श से अर्श और अर्श से फर्श तक

सूर्य की तेज गर्मी और तपते रेगिस्तान में एक व्यक्ति नंगे पैर एक दरागाह की तरफ बढा जा रहा था। दुनिया से बेखबर सिर्फ अपनी मंजिल को पाने के लिये बेताब। उसे तो अपने पैरों में पड़े छालों से रिसते खून से उत्पन्न वेदना का भी एहसास नहीं हो रहा था। यह व्यक्ति था सम्राट अकबर। दरागाह थी शेख सलीम चिश्ती साहब की और जगह थी सीकरी नामक एक गांव की।
दुनिया जानती है कि अपनी संतान ना होने के कारण सम्राट अकबर ने सलीम चिश्ती की दरागाह पर जा मन्नत मांगी थी और शेख साहब के आशीर्वाद से उन्हें पुत्र की प्राप्ति हुई थी। इससे अकबर की खुशी की सीमा ना रही। उसने अपने पुत्र का नाम भी शेख साहब के नाम पर सलीम रखा और उस गांव सीकरी को अपनी राजधानी बनाने का फ़ैसला कर लिया।
यूं सीकरी के भाग्य ने पलटा खाया। एक छोटी सी पहाड़ी पर स्थित यह छोटा सा गांव देखते-देखते पूरे देश की राजधानी बन गया। अपनी गुजरात विजय को अविस्मरणीय बनाने के लिये अकबर ने इसका नाम फतेहपुर सीकरी रख दिया। इसे ऊंची-ऊंची दिवारों से घेर कर अनेकों सुंदर भवनों, मस्जिदों बाग-बगीचों का निर्माण कर सजा दिया गया। दिवारों में भी आवागमन के लिये सात दरवाजे बनाये गये जिनका नाम, दिल्ली दरवाजा, आगरा दरवाजा, ग्वालियर दरवाजा, अजमेरी दरवाजा, मथुरा दरवाजा, बीरबल दरवाजा और चंद्रफूल दरवाजा रखा गया। यहां के भवन ज्यादातर लाल पत्थरों से बनाये गये हैं। यहीं शेख साहब तथा उनके परिवार वालों की कब्रें भी हैं जिन्होंने समय के साथ-साथ तीर्थ स्थल की जगह ले ली है। यहां हर साल भव्य तरीके से उर्स मनाया जाता है जहां दुनिया भर से लाखों लोग अपनी मन्नत पूरी करवाने आते हैं।
पर काल के गाल में सबको समाना पड़ता है। उसकी मजबूत दाढों से आज तक कोई नहीं बच पाया है। वही सीकरी जिसकी तूती सारे देश में गूंजती थी, राजधानी दिल्ली चले जाने के बाद, अपना महत्व धीरे-धीरे खोती चली गयी। आज हालत यह है कि सारे भवनों, स्मारकों, बावड़ियों का अस्तित्व खतरे में है। हर जगह विराने का साम्राज्य है। पर्यटक आते जरूर हैं पर बुलंद दरवाजे जैसी कुछ जगहों को देख लौट जाते हैं। रह जाता है पूरा शहर अपने गौरवमयी इतिहास को जन-जन तक पहुंचाने को आतुर।

6 टिप्‍पणियां:

राज भाटिय़ा ने कहा…

शर्मा जी बहुत अच्छी जानकारी दी आप ने, हम भी सीकरी देख कर वापिस आ जाते है अग्ली बार जरुर सब जगह देखेगे.
धन्यवाद

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी पोस्ट से फतेहपुर-सीकरी देखने की इच्छा जाग्रत हो गयी है।
धन्यवाद!

हिमांशु । Himanshu ने कहा…

सीकरी के सम्बन्ध में अच्छी और रोचक जानकारी । आभार ।

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

बहुत रोचक जानकारी दी आपने.

रामराम.

संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari ने कहा…

आज ही संयोग से फतेहपुर सीकरी के संबंध में हमारे बीच भी चर्चा चली कि आगरे के किले के साथ ही इसे देखना आवश्‍यक है. आगरा रेलवे स्‍टेशन में ही पर्यटन मण्‍डल द्वारा इस पूरे ट्रिप के लिए गाडि़यां और गाईड की व्‍यवस्‍था किफायती दर में की जाती है. आपने इस लेख से उत्‍सुकता और बढ़ा दी अबकी ट्रिप इस फतेह की. धन्‍यवाद.

P.N. Subramanian ने कहा…

बहुत ही बढ़िया जानकारी. सुंदर वर्णन. आभार.

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