शनिवार, 4 जुलाई 2009

सदियों के अनुभव का निचोड़ है ये कहावतें

"कलशे पानी गर्म हो, चिडी न्हावे जब धूल,
जब चींटी अंडा ले चढ़े , वर्षा होसी भरपूर। "
जब घडे में पानी ठंडा न हो, चिडिया धूल में लोटने लगे, चींटियाँ अपने अण्डों को ले ऊंची जगहों पर जाने लगें तो समझ लेना चाहिए कि पानी बरसने वाला है।

"उल्टे गिरगिट ऊंचे चढ़े, बरखा होई भुई जल बढे।"
यदि गिरगिट पेडों पर उलटा चढ़ता दिखे तो बस पानी बरसा ही समझो।

"आगे रवि पीछे मंगल, जो आषाढ़ बरसे , अनमोल हो धरती, उमगें बाढ़।"
आषाढ़ के माह में यदि पहले मंगलवार और बाद में रविवार पड़े तो अच्छी बारिश होती है।

"टोली मिल की कांवली , आय थलां बैठत, दिन चौथे के पांचवें, जल-थल एक करत।"
चीलें जब जमीन पर आकर बैठें तो चार-पाँच दिनों में पानी अवश्य बरसता है।
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चलते-चलते :- बरसात के मौसम में एक आदमी की कार कीचड़ मे फंस गयी। तभी उधर से संता अपने बैल के साथ निकला। उस आदमी ने संता से गुजारिश की कि उसकी गाड़ी को निकलवाने मे मदद करे। संता तो सदा दूसरों की भलाई ही करता रहता है। वह तुरंत तैयार हो गया। उसने अपने बैल को गाड़ी के आगे बांधा और बोला, चल बेटा भोलू जोर लगा। चल मुन्ना जोर से खींच, चल मोहन शाब्बाश जोर लगा के, हां बेटा मोती पीछे ना रहना खींच ले।संता का मोती नाम लेना था कि बैल ने एक झटके से गाड़ी खींच कर बाहर निकाल दी। गाड़ीवाले ने अचंभित हो पूछा, भाई जब तुम्हारे बैल का नाम मोती है तो तुमने पहले इसका नाम ना ले और तीन नाम क्यों पुकारे। संता मुस्कुराया और आदमी को एक किनारे ले जा धीरे से बोला, जनाब मेरा बैल अंधा है। तीन और नाम लेने से उसे लगता है कि वह अकेला नहीं है उसके साथ और भी बैल हैं सो वह काम में लग जाता है। यदि उसे पता चल जाये कि वह अकेला ही जुता हुआ है तो अड़ जाता है।
गाड़ी वाले भाई का मुंह खुले का खुला रह गया।

16 टिप्‍पणियां:

प्रवीण शुक्ल (प्रार्थी) ने कहा…

aap ki kahabto ne bhut gyaan de diya ab mai apne gaav me sabhi ko ye rata doon gaa jok ka to poochiye mat haste haste bura haal hai
saadar
praveen pathik
9971969084

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

घाघ और भड्ढरी की कहावतें
प्रासंगिक हैं।
बहुत बढ़िया।
बधाई।

संगीता पुरी ने कहा…

वाह !!

गिरिजेश राव ने कहा…

इन कहावतों को मैं रट रहा हूँ। वैसे पिताजी बताते हैं कि ऋतु चक्र और प्राणी सम्पदा में अब परिवर्तन हो रहे हैं और जो कहावतें एकदम सटीक थीं, अब उतनी सटीक नहीं रहीं ।

धूल में लोटती गौरैया या जमीन पर बैठी चीलें अब कहाँ दिखती हैं!

संता प्रसंग टीम वर्क के विरोधाभाषों पर भी लागू होता है।. . मुँह तो हमारा भी खुला रह गया था। :)

●๋• सैयद | Syed ●๋• ने कहा…

बहुत बढ़िया !!

राज भाटिय़ा ने कहा…

बहुत खुब सरी कहावते, यह बेल गाडी वाला भी थोडी देर मै आता ही होगा, नाम वो खुद ही बता देगा...

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

सुंदर जी बहुत सुंदर.

रामराम.

महेन्द्र मिश्र ने कहा…

बहुत सुंदर कहावतें...बधाई.

Gagan Sharma, Kuchh Alag sa ने कहा…

गिरिजेश जी,
ठीक कह रहे हैं आप। समय के साथ-साथ बहुत बदलाव आता जा रहा है। चीलें और गिद्ध तो गायब ही होते जारहे हैं। अलबत्ता चिड़ियां और चींटीयां अभी भी पूरानी धरोहरों को संभाले दिख जाती हैं।

वन्दना अवस्थी दुबे ने कहा…

बढिया है.

Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" ने कहा…

बहुत ही बढिया.......

P.N. Subramanian ने कहा…

वैसे कहावते सही ही थीं परन्तु अबतो कलजुग है न. संता की कहानी जोरदार थी. आभार.

Harkirat Haqeer ने कहा…

रोचक व् ज्ञानवर्धक कहावतें ......शुक्रिया ....!!

Ratan Singh Shekhawat ने कहा…

बहुत बढ़िया।

रंजना [रंजू भाटिया] ने कहा…

बहुत सुन्दर सही बनी होगी यह कहावतें

Harigopal Kadel ने कहा…

शानदार

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