बुधवार, 24 दिसंबर 2008

तो फिर ताऊ को छुट्टी कैसे मिली

सीधे सरल हृदय ताऊ के सच कहने के बाद छुट्टी कहां मिलनी थी सो बेचारा उदास बैठा था। इतने में संता वहां आया और उसके उदासी की वजह पूछने पर ताऊ ने सारी बात बता दी। इस पर संता बोला, बस इतनी सी बात है, मुझे देख हर 15-20 दिन बाद मुझे छुट्टी मिल जाती है। ताऊ हैरान, बोला, ए भाई मुझे भी तरकीब बता ना। संता बोला, ले सुन -
कमांडर साहब ने मुझे कह रखा है कि जब भी छुट्टी चाहिये हो तो कोई बड़ा काम कर के दिखाओ। तो जब भी ऐसी जरूरत पड़ती है तो मैं दुश्मन का एक टैंक पकड़ कर ला खड़ा करता हूं और छुट्टी मिल जाती है।ताऊ की आंखें आश्चर्य से चौड़ी हो गयीं मुंह खुला रह गया। किसी तरह पूछ पर भाई तु ऐसा करता कैसे है?
संता मुस्कुरा कर बोला, ओ भोले बादशाह, उन लोगों को छुट्टी की जरूरत नहीं पड़ती क्या? जब उन्हें चाहिये होता है तो हमारा ले जाते हैं।

13 टिप्‍पणियां:

मुसाफिर जाट ने कहा…

"अलग सा" जी नमस्कार,
सही बात है. उन्हें भी तो छुट्टियाँ चाहिए होती हैं. पर वो जो टैंक ताऊ के दोस्त ने दुश्मनों को दिया था, क्या उसकी कोई इन्क्वारी नहीं हुई.

विवेक सिंह ने कहा…

मान गए जी !

cmpershad ने कहा…

भई, ये तो कुछ अलग सा है, अलग सी तदबीर!!

Dr.Parveen Chopra ने कहा…

बहुत अच्छे !!

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

बहुत बढिया तरकीब है जी !

रंजन ने कहा…

हाहाहा!! टैंक ना हो जैसे कमेंट हो गया!! :)

Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" ने कहा…

वाह्! बहुत खूब. यो आइडिया तो बहुत ही जोरदार निकाला, आपसी भाईचारे वाला.

मोहन वशिष्‍ठ ने कहा…

तरकीब अच्‍छी है लेकिन ताऊ के लिए नहीं क्‍योंकि


जब ताऊ को पता चल ही गया कि टैंक लाने से छुटटी मिल जाएंगी तो ताऊ मांग कर थोडी लाएगा ताऊ अपने दुशमनों को मारकर विजेता बन कर टैंक लाएगा क्‍यों ताऊ ठीक बोल्‍या मैं

राज भाटिय़ा ने कहा…

अजी ताऊ को उलटी बाते क्यो समझा रहे हो,ताऊ तो सीधा गले से पकड कर ले आयेगा टेंक के साथ उस के चलाने वाले को.फ़िर इअतने पाकिस्तानियो का कया करेगे??

dhiru singh {धीरू सिंह} ने कहा…

वाह भाई वाह ,मज़ेदार

sareetha ने कहा…

मुल्क का बंटाढार ऎसे ही ताऊओं ने किया है ।

Ratan Singh Shekhawat ने कहा…

ये आईडिया तो बिल्कुल अलग सा लगा !

विनय राजपूत ने कहा…

dam hai aap me ..............


mere blog par pdhare