सोमवार, 22 दिसंबर 2008

बिना बात के तालियाँ

भाटिया जी ने अपने स्कूल की छत गिरने की बात तो बताई, पर उसके बाद वाली बात शायद भूल गये। हुआ क्या कि छत के कारण स्कूल की छुट्टी हो गयी तो बहुत से बच्चे पास लगी सर्कस देखने चले गये। जिनमें राज जी और अपने ताऊ जी के साथ संता तथा बंता भी थे। यह आज तक राज की बात ही रही आज भी घर पर पता ना चले सो मैने इन दोनों का नाम ना ले सिर्फ संता बंता का ही नाम लिया है।
सर्कस शुरु हुआ। तरह-तरह के खेल देख सभी खुश हो रहे थे। तभी घोषणा हुई कि अब सबसे खतरनाक खेल होने जा रहा है। खेल के बीच में कोई ताली ना बजाये।
खेल शुरु हुआ। एक बड़े से सीधे खड़े चक्र पर एक लड़की को बांध कर चक्के को घुमा दिया गया। इधर एक उस्ताद टाईप के आदमी ने अपनी आंखों पर पट्टी बांध कर लड़की पर धारदार चाकू फेंकने शुरु किये। चाकू जा-जा कर लड़की को बिना छुए लकड़ी के चक्के में धंसते गये। यहां तक की बीस एक चाकूओं से लड़की पूरी तरह घिर गयी पर उसे खरोंच तक नहीं आयी। खेल खत्म हुआ, सबने खड़े हो कर तालियां बजा कर कलाकारों की प्रशंसा की।
पर संता और बंता चुप चाप खड़े थे। उनकी समझ में यह नहीं आ रहा था कि जब एक भी चाकू निशाने पर नहीं लगा तो तालियां किस बात की भाई।

10 टिप्‍पणियां:

विनय ने कहा…

बहुत बढ़िया

संगीता पुरी ने कहा…

बहुत सुंदर !!!

निरन्तर - महेंद्र मिश्रा ने कहा…

बहुत बढ़िया जी पर मै समझ गया जी ये संता बंता कौन है बिल्कुल खुल्लास काहे नही लिख देत हो .

dhiru singh {धीरू सिंह} ने कहा…

मान गए आप को अलग से चीज़ ही लाते है ,मज़ेदार

राज भाटिय़ा ने कहा…

अजी मुझे ओर ताऊ को खडा करते चाकू दे कर ... फ़िर देखते निशाना. वो कोई नया नया होगा. :)लोगो को भी कहा इतनी समझ कि कब तालिया बजानी है.
धन्यवाद

रंजना [रंजू भाटिया] ने कहा…

बढ़िया

Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" ने कहा…

बहुत बढिया

चलो हम भी आपकी यह पोस्ट पढकर ताली बजा ही देते हैं.

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

इब सारी बात तो भाटिया जी नै कह दी ! अगली बार हमनै याद कर लेणा जी ! :)

रामराम !

sanjay jain ने कहा…

तालिया तो चाकू फैंकने वाले कलाकार के लिए बजाई जा रही थी लड़की के लिए नहीं / संता और बंता का ध्यान तो केवल लड़की पर था इसलिए वो तालिया नहीं सीटिया बजा रहे थे / वाह क्या बात है ! सुंदर

प्रदीप मानोरिया ने कहा…

बहुत सुंदर वास्तव में अलग सी बात है | बधाई सुंदर घटना की प्रस्तुति के लिए