शुक्रवार, 19 दिसंबर 2008

एक बार छू कर तो देख

एक ताऊ और जिन्होनें हास्य की विधा को सम्मानजनक ऊंचाईयों पर पहुंचाया। उन्हीं जेमिनी हरियाणवी जी का एक गुदगुदाता चुटकुला, उन्हीं के शब्दों में (माफ किजियेगा हिंदी में कह पाउंगा) -
एक बार एक पड़ोस का लड़का मेरे पास आ कर बोला, ताऊ, इस्त्री चाहिये। मैने छोरे को ऊपर से नीचे तक देखा, उसकी उम्र देखी। फिर मन में सोचा मुझे क्या और बोला, जा अंदर बैठी है, ले जा। लड़के ने अंदर झांका और बोला वो नहीं, कपड़े वाली चाहिये। मैं बोला, अबे दिखता नहीं क्या, कपड़े पहन कर ही तो बैठी है। छोरा फिर बोला, अरे नहीं ताऊ वो वाली जो करंट मारती है। मैं बोला, एक बार छू कर तो देख।

11 टिप्‍पणियां:

COMMON MAN ने कहा…

wah ji, bahut dino baad suna/padha majaa aaya.

विवेक सिंह ने कहा…

मज़ा आगया ! स्त्री और इस्त्री में थोडा ही फर्क है :)

dhiru singh {धीरू सिंह} ने कहा…

karent to dono marti hai .theek hai na

परमजीत बाली ने कहा…

bahut badhyaa!!

cmpershad ने कहा…

हां भाई, करंट भी मारेगी और गरम भी होगी। बच के रहना रे बाबा...

Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" ने कहा…

बहुत मजेदार. वो कहते है ना हरियाणवी मे कि 'जमीं सवाद सा आ गया'

विष्णु बैरागी ने कहा…

यह चुटकुला जब जैमिनी सुनाते हैं तो उसका आनन्‍द ही अलग है । लगता है, ख्‍ुटकुले का प्रत्‍येक शब्‍द मंच पर आकर अपनी बात कह रहा हो ।

P.N. Subramanian ने कहा…

वाह भाई मज़ा आ गया. करेंट लग गयी.

राज भाटिय़ा ने कहा…

अरे विवेक भाई कोई फ़र्क नही ... शर्मा जी का तजुर्वा है.... ओर कपडे भी दोनो ही प्रेस करती है.
शर्मा जी आज तो दिल खुश कर दिया.
धन्यवाद

अनूप शुक्ल ने कहा…

करेंट पोस्ट!

प्रशांत मलिक ने कहा…

:)