गुरुवार, 23 अक्तूबर 2008

सनकी, कैसे कैसे

दुनिया का इतिहास तरह-तरह के सनकियों से भरा पड़ा है। आईये दो-एक का जायजा लें।

मुहम्मद बिन तुगलक को पता नहीं क्या सूझी, अच्छी भली अपनी राजधानी दिल्ली को छोड़ कर वहां से 600 मील दूर दौलताबाद में नयी राजधानी बसाने की सनक ने करीब तीस हज़ार परिवारों को बेसहारा भटकने के लिए मजबूर कर दिया था। वह जानता था कि उसके इस कदम से लोग खुश नहीं हैं, ऐसे लोग आने से इंकार ना कर दें, इसलिए उसने दिल्ली के घरों-दुकानों में आग लगवा कर नष्ट करवा दिया। सैकड़ों लोग मौत के मुंह में चले गये। जले पर नमक तब छिड़का गया, जब 15 वर्ष बाद फिर प्रजा सहित राजधानी को उठवा कर वापस दिल्ली ले आया गया।
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रूस का ईवान चतुर्थ तो तुगलक से भी एक कदम आगे निकला। उसने अपने परिवार, नौकरों-चाकरों, सैनिकों और खजाने के साथ अपनी राजधानी मास्को छोड़ दी, और एक बीहड़, सुनसान इलाके की ओर रवाना हो गया। कुछ दिनों बाद उसने वहां से संदेश भेजा कि राज्य की परिस्थितियों से दुखी होकर वह अपनी गद्दी का अधिकार छोड़ रहा है। सबको लगा कि वह गद्दी छोड़ रहा है। पर असल में वह देखना चाहता था कि उसके राज्य छोड़ने से कौन-कौन खुश होता है। पर उसकी यह चाल उसके मंत्री व अधिकारी समझ गये थे। वे सब मिल कर उसके पास गये और उससे प्रार्थना की कि वह राज-पाट ना छोड़े, क्योंकि वही एकमात्र इस लायक है, जो यह भार संभाल सके। इवान खुश हो गया और वापस आ गया। परन्तु आते ही उसने प्रार्थना करने वाले मंत्रियों के सर यह कह कर कटवा डाले कि वे राज्य भार कुछ समय तक संभालने में भी समर्थ नहीं हैं।
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हंगरी की कौन्टेस एलिजाबेथ बाथोरी अत्यंत रूपवती थी और चाहती थी कि उसका रूप सदा वैसा ही बना रहे। कुछ तांत्रिकों ने उसे विश्वास दिला दिया था कि यदि वह कुवांरी कन्याओं का रक्त पियेगी व उनके रक्त से स्नान करेगी तो उसका रूप-रंग कभी खत्म नहीं होगा। उसकी शादी एक अधिकारी से हुई थी। पर धीरे-धीरे उसने अपनी पहुंच शाही दरबार तक बना ली थी। वह एक तानाशाह किस्म की औरत थी। दरबार में प्राप्त अपनी शक्तियों का उसने खूब दुरुपयोग किया। कहा जाता है कि अपने पागलपन में उसने करीब 600 से अधिक कुंवारी लड़कियों का रक्त पिया और उनके रक्त से स्नान किया। लेकिन एक दिन उसके खून पीने का रहस्य खुल गया। उसको कठोर दंड दिया गया। जहां छिप कर वह खून पीती थी उसी जगह उसे कैद कर रखा गया। वहीं एक दिन उसकी मौत हो गयी।

5 टिप्‍पणियां:

समयचक्र - महेद्र मिश्रा ने कहा…

vah re gajab ke sanaki rahe hai is duniya me. rochak.

dhiru singh {धीरू सिंह} ने कहा…

aise logo ke baare main padh kar laga sank kya kya karvati hai

जितेन्द़ भगत ने कहा…

मैं आपको पढ़ता रहा हूँ। आपके ब्‍लॉग का नाम आपकी पोस्‍ट को जँचता है। इस बार भी रोचक सामग्री आपने प्रस्‍तुत की है। धन्‍यवाद।

संगीता पुरी ने कहा…

रोचक लगी... बहुत जानकारी मिली...धन्यवाद।

राज भाटिय़ा ने कहा…

बहुत ही नयी जानकारियां आप ने दी, लेकिन आज भी तो कई बीबीयां अपने शोहर का खुन पीती है:)
धन्यवाद